उत्तराखंड त्रासदी में बीमारी और भूख से जवान बेटा-बेटी ने गोद में दम तोड़ दिया, लेकिन बेबस मेरठ निवासी सुनील कुमार शर्मा और उपमा कुछ नहीं कर पाए।
दोनों का अंतिम संस्कार तक भी नहीं कर पाए। शव जब सड़ने लगे तो मजबूरी में उन्हें नदी में बहाना पड़ा। दो बेटियों के साथ जैसे-तैसे दंपति घर लौटा। लेकिन पति-पत्नी इस गम से उबर नहीं पा रहे हैं।
रुड़की की आवास विकास कालोनी में किराए पर रह रहे सुनील कुमार शर्मा भगवानपुर स्थित एक दवा कंपनी में मैनेजर हैं। 14 जून को वह पत्नी उपमा, बेटी अनुराधा (22), डोली (20), पिंकी (19) और बेटे शिवांग (18) के साथ कार से केदारनाथ यात्रा पर गए।
15 जून की सुबह उन्होंने बाबा केदार के दर्शन किए। इसके बाद वे वापस गौरीकुंड की ओर चल दिए। लेकिन शाम के समय अचानक आई प्रलय में उनकी बेटी पिंकी उनसे बिछुड़ गई।
विनाशकारी प्रलय में लोगों को मरता देख रात में अनुराधा और शिवांग बेहद घबरा गए। उनकी हालत बिगड़ गई। तेज बारिश, ठंड और खाने-पीने की भी चीज न होने की वजह से पहले तो रात के समय अनुराधा ने मां-बाप की गोद में दम तोड़ दिया।
इससे उबरने का मौका भी नहीं मिला था कि सुबह के समय शिवांग की भी मृत्यु हो गई। लापता बेटी, दो बच्चों की मौत और विनाशकारी प्रलय ने सुनील और उपमा को पूरी तरह से तोड़ दिया।
लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपनी बेटी डोली की खातिर हिम्मत जुटाई। एक दो दिन में जब बेटा-बेटी के शव सड़ने लगे तो मजबूर और बेबस मां-बाप को शव नदी में बहाने पड़े।
सुनील और उपमा ने भूखे प्यासे बेटी डोली के साथ लापता पिंकी की तलाश की और वह उन्हें एक स्थान पर मिल गई। पांच दिन तक वह भूखे-प्यासे पहाड़ों में भटकते रहे। फाटा में पहुंचने पर उन्हें कुछ नाश्ता मिला।
जिससे उनके शरीर में थोड़ी जान आई। इसके बाद उन्हें गुप्तकाशी पहुंचाया गया। जहां से सुनील अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ सोमवार दोपहर के समय रुड़की पहुंचे।
बेटे, बेटी की मौत और विनाशकारी प्रलय को वह भुला नहीं पा रहे हैं। उनकी बेटियां भी डरी हुई हैं। सुनील मेरठ स्थित परलोकपुरम के रहने वाले हैं। अब वह दोनों बेटियों और पत्नी के साथ मेरठ चले गए हैं। उनकी दु:खभरी दास्तां को जिसने भी सुना, उसके रोंगटे खड़े हो गए।