चंपावत। जिले में मात्र चार वर्षों में 19 सरकारी विद्यालय बंद हो गए हैं। इनमें से आधे से अधिक में इसी साल ताला लगा है। गांवों से पलायन और छोटे बच्चों की संख्या में गिरावट इसकी मुख्य वजह बताई गई है।
वर्ष 2020 से अब तक जिले में 17 प्राथमिक स्कूल और एक राजकीय पूर्व माध्यमिक स्कूल बंद हो चुका है। इनमें से 10 राजकीय प्राथमिक स्कूल वर्तमान शिक्षा सत्र 2023-24 में ही बंद हुए हैं। बंद हुए इन विद्यालयों में पिछले साल एक से लेकर पांच तक छात्र-छात्रा थे लेकिन पांचवीं कक्षा के इन विद्यार्थियों के पास होने और नए प्रवेश नहीं होने से ये स्कूल बंद हो गए।
इन विद्यालयों में तैनात नौ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में समायोजित किया गया है जबकि भोजन माताओं को हटा दिया गया है। इन विद्यालयों के बंद होने से राजकीय प्राथमिक स्कूल 485 से घटकर 467 रह गए हैं। इसके अलावा 90 राजकीय जूनियर हाईस्कूल हैं। प्राथमिक स्कूलों में 10,525 और जूनियर हाईस्कूल में 2363 छात्र-छात्राएं हैं।
इस तरह बंद हुए स्कूल
वर्ष - बंद स्कूल
2020 - 1
2021 - 1
2022 - 7
2023 - 10
चार साल में बंद हुए ये स्कूल
बंद हुए प्राथमिक विद्यालय
लड़ाबोरा, खेतसारी, कुलौली, कुलियालगांव, बुंगाख्याली, गड़कोट, मझेड़ा, भीजर, मन्टांडे, डूंगरासों, मथेला छाना, पैडुसेरा, पिनानाभाट, अमौन, महरपिनाना, ल्वार्की, बिल्हेड़ी और चौड़ी।
उच्च प्राथमिक विद्यालय में ताला
पाटी ब्लॉक का चमतोला।
कोट
इस शिक्षा सत्र में 10 राजकीय प्राथमिक विद्यालय छात्र संख्या शून्य होने से बंद हुए हैं। यदि कोई छात्र-छात्रा यहां प्रवेश लेंगे तो विद्यालय को फिर से संचालित किया जाएगा। यहां के शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में समायोजित किया गया है। चार साल में 19 स्कूल बंद हुए है। इसकी बड़ी वजह गांवों से आसपास के कस्बों या शहर की ओर ग्रामीणों का जाना है। - आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।