चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम का रज्जुमार्ग (रोपवे) का काम आठ साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। इस रज्जुमार्ग परियोजना का शिलान्यास जून 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया था।
जुलाई 2017 में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी रोपवे को जल्द पूरा करने का एलान किया था। मृदा परीक्षण और अन्य तकनीकी अड़चन से काम शुरू नहीं हो पाया। इसे दिसंबर 2016 तक पूरा हो जाना था। जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ का कहना है कि मृदा परीक्षण के बाद रुड़की आईआईटी की ओर से मिली हरी झंडी के बाद रज्जुमार्ग के काम को शुरू करने के कंपनी को निर्देश दिए गए हैं। संवाद
रज्जुमार्ग की खासियतः हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक के इस रज्जुमार्ग की लंबाई 903.225 मीटर है। चार ट्रॉलियों में एक घंटे में 800 यात्रियों की आवाजाही हो सकेगी। ठुलीगाड़ में प्रशासनिक भवन, पार्किंग, कमरे बनेंगे। लोअर टर्मिनल में रज्जुमार्ग स्टेशन भवन, यात्री होल्डिंग एरिया, टिकट काउंटर, प्रशासनिक कार्यालय आदि होंगे। मुख्य मंदिर के पास अपर टर्मिनल बनेगा। सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा।
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बीमार और बुजुर्गों को मिलेगी सुविधा
भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर तक के साढ़े तीन किमी से अधिक मार्ग पर पैदल सफर में एक घंटे से अधिक समय लगता है। रज्जुमार्ग से देवी दर्शन के लिए पैदल फासला तय नहीं करना होगा। दूरी को तय करने में भी 10 मिनट लगेंगे। कम समय लगने के अलावा पहाड़ में चलने में असमर्थ लोग, बड़े-बुजुर्ग, छोटे बच्चे, बीमार और दिव्यांग भी आसानी से दर्शन कर सकेंगे।
कोट
पूर्णागिरि रज्जुमार्ग का काम शुरू करने के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। बिजली के संयोजन के लिए प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अक्तूबर से काम शुरू करने के बाद दो साल में परियोजना पूरी कर ली जाएगी।
अनिल शर्मा, निदेशक, पूर्णगिरि रोपवे प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली।