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चंपावत जिला मुख्यालय में पेयजल की लिए हाहाकार

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चंपावत में जल संस्थान के टैंकर से पानी भरते ऊर्जा निगम के खंडीय कार्यालय के कर्मी। फोटो: संवाद न्? - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। इसी माह 18 अक्तूबर से हुई भारी बारिश के कारण क्षेत्र की 35 से अधिक पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हैं। इससे नगर क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ/ग्रिफ) के कर्मियों के लिए पेयजल की आपूर्ति चंपावत से 13 किमी दूर धौन से टैंकर के जरिये करनी पड़ रही है क्योंकि ग्रिफ को रोजाना 15 हजार लीटर पानी की जरूरत है।
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वहीं ऊर्जा निगम के चंपावत खंडीय कार्यालय में भी पानी की कमी है। इस कार्यालय में भी जल संस्थान के टैंकर के जरिये पेयजल आपूर्ति हो रही है। इजड़ा, तल्ली खरही, मल्ली खरही, अमोड़ी, धौन, स्वांला, तल्लादेश सहित 81 से अधिक गांवों में पानी का संकट गहराया है। इन इलाकों के लोग पानी के लिए प्राकृतिक स्रोतों का सहारा लेने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने अविलंब पेयजल आपूर्ति सुचारु करने की मांग की है।
इधर जल संस्थान के ईई बिलाल यूनुस ने बताया कि भारी बारिश के कारण मुख्यालय को जोड़ने वालीं पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने के कारण नगर में जलापूर्ति बाधित हुई है। टैंकरों और अन्य वाहनों के माध्यम से नगर क्षेत्र में जलापूर्ति की जा रही है। क्षतिग्रस्त लाइनों को ठीक करने का कार्य दिन-रात किया जा रहा है। शीघ्र ही पेयजल वितरण व्यवस्था सुचारु की जाएगी।
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जिले में 76 योजनाएं अब भी क्षतिग्रस्त
चंपावत। आपदा से क्षतिग्रस्त हुई कई पेयजल योजनाएं अब भी ठीक नहीं हो सकी है। चंपावत जिले में जल संस्थान की क्षतिग्रस्त 101 पेयजल योजनाओं में से अभी 71 और पेयजल निगम की 100 में से 62 ही ठीक हो सकी है। विभागीय इंजीनियरों का कहना है कि अन्य योजनाओं को भी जल्द ठीक करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
पानी का टैंकर आते ही उमड़ रही भीड़
चंपावत। शीतकाल के बावजूद जिला मुख्यालय में पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है। पेयजल के लिए लोगों को घंटों तक जूझना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को जल संस्थान का पानी का टैंकर आते ही भीड़ जुट गई। गोरलचौड़ लाइन में सुबह से ही खाली बर्तनों के साथ कई जगह भीड़ उमड़ी। कई लोगों को दूर से भी पानी ढोना पड़ा।
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