चंपावत। मतदान निपटने के बाद यह तय हो गया है कि प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला विधानसभा क्षेत्र के मैदानी वोटर करेंगे। ये सिर्फ इसलिए नहीं कि वहां अधिक मतदाता है, बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने अपने मताधिकार के प्रति अधिक संजीदापन दिखाया। और बढ़-चढ़कर वोटिंग की। पहाड़ में 60.84 प्रतिशत लोगों ने वोट दिए, जबकि मैदान के 71.01 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
पहाड़ और मैदान से मिलकर बनी चंपावत सीट में मैदानी क्षेत्र 15 फीसदी से भी कम है। निर्वाचन अधिकारी एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि 96016 वोटरों में से 47365 पहाड़ में तो 48651 मैदान में हैं। पहाड़ी क्षेत्र में 28820 लोगों ने वोट दिए, जबकि मैदानी क्षेत्र ने मताधिकार की जिम्मेदारी को अधिक बेहतर तरीके से निभाते हुए 34550 लोगों ने मतदान कर निर्णायक भूमिका निभाई है। चंपावत सीट के कुल मतदाताओं में से 54.52 प्रतिशत मैदान और 45.48 प्रतिशत पहाड़ के लोगों ने वोट किया।
भौगोलिक स्थिति ने बढ़ाई बूथों से दूरी
यह ठीक है कि पहाड़ का बड़ा क्षेत्र और भौगोलिक स्थितियों के चलते मतदेय स्थल कुछ दूरी पर थे, जिससे कुछ अधिक चलना पड़ा। जबकि मैदानी क्षेत्र में मतदेय स्थल की दूरी एक किलोमीटर से भी कम होने का भी लाभ मिला। पहाड़ के लोगों का ये मानना है कि सीट के इस भौगोलिक स्वरूप से पर्वतीय क्षेत्र को विकास में खामियाजा भुगतना पड़ता है। मैदान का प्रत्याशी होने से लोगों में क्षेत्रवाद का पुट भी रहता है। इस बार सात प्रत्याशियों में से बसपा को छोड़ शेष छह प्रत्याशी भी मैदान से थे।
चंपावत विधानसभा सीट पर वोट
जगह: कुल वोटर- मतदान हुआ- मतदान प्रतिशत
मैदान: 48651- 34550- 71.01
पहाड़: 47365- 28820- 60.84