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सब्जी गायब, दाल से मिट रही ग्रामीणों की भू्ख

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चंपावत। चंपावत ब्लॉक का यहां से 23 किमी दूर का गांव स्वांला। कोरोना की दूसरी लहर में चंपावत जिले का सबसे चर्चित गांव। गांव को जाने वाले रास्ते में लगा बोर्ड और रस्सा यहां से गुजरने वाले हर किसी व्यक्ति को चौंकाता है। 650 की आबादी वाला यह गांव कंटेनमेंट जोन बना है और बीते आठ दिन से अलग-थलग पड़ा है। एक साथ 47 ग्रामीणों के कोरोना संक्रमित आने से कंटेनमेंट जोन बने इस गांव में सब्जियों की कमी है। गांव के एक-चौथाई लोग रात के वक्त सब्जी के बजाय दाल के आसरे पेट भर रहे हैं।
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कंटेनमेंट जोन बने स्वांला गांव के लोगों के लिए वक्त काटना मुश्किल हो रहा है। ना कोई काम है और न ही कहीं दूसरी जगह आना-जाना। मिलना-जुलना भी नहीं कर सकते। कंटेनमेंट जोन से लगे दूसरे गांव के लोग इन दिनों अदरक की सामूहिक खेती कर रहे हैं, लेकिन स्वांला का यह इलाका इससे भी वंचित है। गांव में दूध प्रचुर मात्रा में है। वहीं प्रशासन द्वारा जरूरतमंदों को खाद्यान्न मुहैय्या कराने से दिक्कत नहीं है। लेकिन दो-तिहाई ग्रामीणों के लिए सब्जी की किल्लत बनी है। और अब रात को भी गांव के लोग दाल, झोली आदि के सहारे भूख मिटा रहे हैं। इस वक्त पानी की कमी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। (संवाद)
अस्पताल पास, इलाज दूर...
चंपावत। कोरोना संक्रमण से जूझ रहा स्वांला गांव इस वक्त कंटेनमेंट जोन में तब्दील है। लेकिन सामान्य वक्त में यहां के लोगों की सबसे बड़ी चुनौती इलाज की कमी है। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन इलाज के लिए नहीं। अस्पताल में लटका ताला यहां के लोगों को इलाज के लिए राम भरोसे रखता है। अस्पताल में ना डॉक्टर है और न ही फार्मेसिस्ट और दूसरा स्टाफ। अगर अस्पताल के नाम का साइनबोर्ड ना लगा होता, तो कोई यह भी जान नहीं पाता कि यहां अस्पताल भी है। अस्पताल के लगातार बंद रहने से मरीजों ने आना भी बंद कर दिया है। स्वांला के मरीज सात किमी दूर धौन अस्पताल में जाने को मजबूर है। लेकिन इन दिनों अकेले फार्मेसिस्ट भूपेश जोशी ही मरीजों का परीक्षण करने से लेकर दवा देने का काम कर रहे हैं। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि यहां के डॉक्टर को कोरोना की ड्यूटी में भेजा गया है। वहीं फार्मेसिस्ट की जल्द तैनाती करने की बात कही ज रही है।
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स्वांला का हर सातवां व्यक्ति संक्रमित
चंपावत। स्वांला गांव के लोगों की बड़ी संख्या मई के शुरू में बुखार और खांसी से पीड़ित थी। ऐसे में प्रतिनिधियों की पहल पर यहां कोरोना जांच का शिविर लगा। 351 लोगों ने परीक्षण कराया, तो 47 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। यानी जांच कराने वाले हर 15 लोगों में से दो लोग संक्रमित पाए गए। गांव में 17 साल का मुकेश सबसे कम उम्र का, तो 67 वर्ष के घनश्याम सबसे अधिक आयु के संक्रमित हैं। अलबत्ता अच्छी बात यह है कि ये सभी अब ठीक हो रहे हैं। डॉ. मनीष बिष्ट का कहना है कि सभी संक्रमित लोगों की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है।
कंटेनमेंट जोन बनने के बाद स्वांला में हो चुकी हैं दो शादियां
चंपावत। कंटेनमेंट जोन बने स्वांला शादियों के चलते भी सुर्खियों में रहा। 12 मई को स्वांला गांव के डुंगर देव के बेटे प्रकाश भट्ट और 14 मई को दिलेराम भट्ट के बेटे प्रकाश भट्ट का ब्याह हुआ था। इन दोनों विवाहों की खास बात यह है कि स्वांला से बरात कन्या पक्ष के गांव ना जाकर कन्या पक्ष के चार लोग ही स्वांला गांव पहुंचे थे।
कोट
कोरोना की दूसरी लहर से दिल्ली से काम छोड़ अपने गांव पहुंचा। लेकिन काम नहीं होने और गांव के कंटेनमेंट जोन में बदलने से मुश्किलें बढ़ी है।
राजेंद्र भट्ट, स्वांला।
कोरोना संक्रमित के मामले बढ़ने से शुरू में लोग डरे हुए थे। लेकिन अब सही जानकारी मिलने के बाद लोग कोरोना से बचाव के सभी उपाय कर रहे हैं।
हेम भट्ट, स्वांला।
बुखार और खांसी की शिकायत के बाद जांच में कोरोना संक्रमित मिले। लोगों को सब्जी की किल्लत है। इसके चलते ज्यादातर वक्त दाल से काम चल रहा है।
ईश्वरी दत्त भट्ट, बीडीसी सदस्य।
कंटेनमेंट जोन बनने के बाद स्वांला में खामोशी है। कोरोना से बचाव की जानकारी देने के बाद लोगों में कुछ हौसला जगा।
ममता भट्ट, ग्राम प्रधान।
स्वांला के कंटेनमेंट जोन के लिए खाद्यान्न की निरंतर व्यवस्था की गई है। अलबत्ता सब्जी की कमी की गांव की ओर से जानकारी नहीं मिली। जरूरत होने पर उस क्षेत्र के सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में साक-भाजी उपलब्ध कराई जाएगी। जहां तक पेयजल की कमी की बात है, तो जल संस्थान से खामी दूर कर आपूर्ति सुचारु करने के लिए कहा गया है।
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ज्योति धपवाल,
तहसीलदार, चंपावत।
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