अपने राज्य में पराई सड़क। सुनने में भले ही यह अटपटा लगता है, लेकिन है सौ आने सच। उत्तराखंड को तीन दिन बाद 23 साल हो जाएंगे लेकिन चंपावत जिले के प्रवेशद्वार बनबसा से बैराज तक नेपाल जाने वाली 3.300 किमी की यह सड़क अपनी नहीं है। इस पर यूपी का स्वामित्व है।
यह सड़क सिंचाई विभाग बरेली के अधिकार क्षेत्र में है। दोनों राज्यों में परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं होने से यह नौबत आई है। एनएचपीसी की टनकपुर जल विद्युत परियोजना का मुख्यालय भी इसी रास्ते पर है। कैनाल विभाग की इस सड़क के हाल भी खास ठीक नहीं है, लेकिन यूपी सिंचाई विभाग इस सड़क से गुजरने वाले चौपहिया वाहनों और तांगों से शुल्क वसूलता है। शारदा हेडवर्क्स के अधिकारियों का कहना है कि शुल्क सड़क के रखरखाव के लिए लिया जाता है। इस सड़क से गुजरने वाले चौपहिया वाहनों से 15 से 60 रुपये तक वसूले जाते हैं।
डीएम बोले: दोनों राज्यों के बीच इस परिसंपत्ति का बंटवारा नहीं होने से यह सड़क अभी यूपी कैनाल के स्वामित्व में है।
- नवनीत पांडे, डीएम, चंपावत।
इस सड़क का उपयोग यूपी सिंचाई विभाग के बैराज के लिए डिजाइन की मरम्मत और रखरखाव के हिसाब से किया गया था। कोई विकल्प नहीं होने से इस सड़क से आम वाहनों की आवाजाही हो रही है। सड़क और विभाग की अन्य भूमि यूपी की है। परिसंपत्ति के बंटवारे में यह सड़क उप्र के पास ही रहेगी।
- प्रशांत कुमार वर्मा, एसडीओ, शारदा हेड वर्कस, बनबसा।