टनकपुर (चंपावत)। पहाड़ के प्रवेश द्वार टनकपुर में लंबे समय से गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधा केंद्र ट्राम सेंटर की आवश्यकता महसूस की गई। वर्ष 2015 में उप जिला अस्पताल में करोड़ों की लागत से ट्रामा सेंटर बना। चिकित्सकों के पद भी सृजित हुए। अक्तूबर में ऋषिकेश एम्स की टीम ने भी सर्वे किया, लेकिन संचालन आज तक नहीं हो सका। अब इस भवन को पुस्तकालय और 108 सेवा कर्मियों आवास बनाया गया है। भवन में ट्रामा सेंटर की परिकल्पना ने दम तोड़ दिया है।
टनकपुर में ट्रॉमा सेंटर का 2.2 0 करोड़ की लागत से निर्माण किया गया। निर्माण पूरा होने के बाद ट्रॉमा केंद्र संचालन के लिए न्यूरो सर्जन, निश्चेतक, सर्जन समेत बार विशेषज्ञ चिकित्सक और 21 पैरा मेडिकल स्टाफ के पद सृजित किए गए, लेकिन नौ वर्ष बाद भी ट्रामा सेंटर का अपने भवन में संचालन नहीं हो पाया है। आलम यह है कि करोड़ों के भवन में पुस्तकालय चल रहा है।
इस मामले में सीएमएस डाॅ. घनश्याम तिवारी ने बताया कि वर्ष 2023 में एम्स ऋषिकेश की टीम ने संचालन को लेकर सर्वे किया था, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। अब ट्रामा सेंटर की व्यवस्थाओं को अस्पताल में अपने संसाधनों से किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर के लिए बने भवन में 13 मार्च 2023 से 10 सितंबर तक दिव्यांग सेंटर खुला था। अब भवन को पुस्तकालय और 108 सेवा कर्मियों के आवासीय उपयोग में लिया जा रहा है।