चंपावत। 21वीं सदी के 21 साल बीतने में बस एक माह बाकी है लेकिन इस दौरान चंपावत शहर न तो स्मार्ट हो सका और न ही आधारभूत सुविधाओं से सुसज्जित। आबादी में जरूर तेजी से इजाफा हुआ और इससे भी ज्यादा हुआ अनियंत्रित विकास। इसका दुष्परिणाम यह कि शहरी लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
नगर पंचायत से उच्चीकृत हो चंपावत को 2013 में नगर पालिका का दर्जा मिला, तो छतार, खर्ककार्की और जूप गांवों को शहर में शामिल कर लिया गया। इससे नगर क्षेत्र का रकवा दो वर्ग किमी से बढ़कर तीन किमी वर्ग क्षेत्र हो गया और आठ हजार की आबादी बढ़कर 12756 तक पहुंच गई।
चंपावत में दो दशक पहले महज 451 मकान थे, जो अब 2529 तक पहुंच गए हैं। पार्किंग नहीं होने से जाम रोजमर्रा में शुमार हो गया है तो वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी से यातायात अव्यवस्था के सिरदर्द बन गई है।
चंपावत में छतार नया शहरी इलाका बन रहा है, लेकिन सटे मकान, अच्छे और चौड़े रास्तों की कमी, पथ प्रकाश के अभाव से मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। संकरे रास्ते शहर के नियोजित विकास पर बड़े अवरोधक हैं।
इस क्षेत्र के जिला विकास प्राधिकरण में शामिल होने के बाद भवन निर्माण के लिए लोगों की जेब तो ढीली हो रही है, लेकिन न निर्माण तरीके से हो रहा है और न ही क्षेत्र के विकास के ढर्रें में सुधार। सीवरेज व्यवस्था नहीं होने से तो दुश्वारी हो रही है, कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था न होना भी दो दशक पुरानी है।
ट्रंचिंग ग्राउंड का काम निर्माणाधीन है। चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति का कहना है कि नगर के नियोजित विकास के लिए सीवरेज, पार्किंग, चौड़े रास्तों के निर्माण सहित कई जरूरी कदम उठाने होंगे। वहीं ईओ भूपेंद्र प्रकाश जोशी का कहना है कि नगर के विकास के लिए नगरपालिका व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रही है।