बनबसा शरदा नदी पर बनता वैकल्पिक मार्ग। स्रोत: संवाद
- फोटो : बनबसा शरदा नदी पर बनता वैकल्पिक मार्ग। स्रोत: संवाद
बनबसा (चंपावत)। ऐतिहासिक शारदा बैराज के जीर्णशीर्ण मुख्यमार्ग का जल्द जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। 95 वर्ष पुराने बैराज के मार्ग के रखखाव होने तक आवागमन के लिए शारदा नदी पर वैकल्पिक मार्ग बना लिया गया है। बैराज मार्ग को दुरुस्त करने तक भारत नेपाल के बीच नदी पर बने वैकल्पिक मार्ग से आवागमन होगा। बैराज मार्ग की मरम्मत में डेढ़ से दो माह का समय लगने का अनुमान है।
यूपी सिंचाई विभाग के बनबसा शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि बैराज मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के कारण इसकी मरम्मत कराई जानी है। बताया कि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर बैराज के मुख्यमार्ग का जीर्णोद्धार किया जाएगा। बैराज मार्ग का निर्माण लगभग डेढ़ से दो माह के बीच संपन्न करा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इन दिनों नदी में कम पानी होने से भारत-नेपाल के बीच आवागमन के लिए नदी पर वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कराया गया है। सोमवार को रोलर चलाकर वैकल्पिक मार्ग का समतलीकरण कार्य संपन्न हुआ। एक-दो दिन में वैकल्पिक मार्ग पर आवागमन का परीक्षण किए जाने के बाद बैराज से अवागमन बंद कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। संवाद
वर्ष 1928 में कराया गया था बैराज का निर्माण
बनबसा (चंपावत)। यूपी में 22,08,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए वर्ष 1928 में अंग्रेज प्रशासकों ने बनबसा में शारदा बैराज का निर्माण कराया था। तत्कालीन यूपी संयुक्त प्रांत के गवर्नर सर मैल्कम हेली ने 11 दिसंबर 1928 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। बैराज उत्तराखंड की भूमि पर होने के बाद भी परिसंपत्तियों के बंटवारे के अभाव में अभी भी यूपी सिंचाई विभाग के पास ही है। बनबसा से यूपी के रायबरेली तक करीब 550 किमी तक शारदा नहर से सिंचाई होती है। संवाद