लोहाघाट (चंपावत)। देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का क्षेत्र बाराकोट में आजादी के 77 साल बाद भी सुविधाओं का अभाव है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन बाराकोट क्षेत्र का विकास नहीं कर पाईं। उत्तर प्रदेश के दौर से ही जनता विकास को तरस गई थी। उत्तराखंड निर्माण के बाद भी सरकारें आईँ गईं पर बाराकोट के विकास के लिए पुख्ता कदम नहीं उठाए गए।
बाराकोट में युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के लिए कोई भी डिग्री कॉलेज, तकनीकी शिक्षा के लिए राजकीय पॉलीटेनिक, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकालय की कोई व्यवस्था नहीं है। युवाओं के खेलने के लिए कोई खेल का मैदान, बाहर से आने वाले अतिथियों के ठहरने के लिए एक भी अतिथि गृह नहीं है। तहसील बनने के बाद भी तहसील में एसडीएम का पद सृजित नहीं है। युवाओं को तकनीकी शिक्षा देने के लिए खोला गया आईटीआई भी बंद हो चुका है, रेगडू में आईटीआई की घोषणा कोरी साबित हुई। संवाद
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देश की आजादी में इन सेनानियों का रहा योगदान
लोहाघाट (चंपावत)। देश को आजादी दिलाने में बाराकोट क्षेत्र के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। बाराकोट क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण सिंह अधिकारी, गणेश सिंह अधिकारी, शेर सिंह अधिकारी, नैन सिंह अधिकारी, बच्ची सिंह, लीलाधर जोशी, शिवराज सिंह, उमापति जोशी, लालमणि जोशी, शेर सिंह, गणेश नाथ आदि कई लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। संवाद
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बाराकोट क्षेत्र के एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की जरूरत है। - प्रहलाद सिंह अधिकारी, कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष, बाराकोट
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देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के क्षेत्र बाराकोट का कोई सुधलेवा नहीं है। - राजू अधिकारी, ग्राम प्रधान