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मां पूर्णागिरि धाम में चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधा तक नहीं

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मां पूर्णागिरि धाम के सेलागाड़ में बना एमआरसी (चिकित्सा राहत केंद्र) का भवन। विज्ञप्ति - फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार का डंका पीटा जाता है लेकिन धाम में चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं और धाम क्षेत्र के लोगों को 18 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है। करीब 15 साल पहले निर्मित चिकित्सा राहत केंद्र (एमआरसी) खंडहर बन चुका है लेकिन इसमें कभी कोई चिकित्सा कर्मी तैनात नहीं किया गया। करीब पांच माह पूर्व विभाग की ओर से स्वास्थ्य कर्मी की तैनात का वायदा भी हवाई साबित हुआ है।
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मां पूर्णागिरि धाम उत्तर भारत में आस्था और श्रद्धा का बड़ा और प्रमुख केंद्र है। जहां हर साल उत्तर भारत समेत देश के कोने-कोने से 25 से 30 लाख की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चैत्र नवरात्रों में लगने वाले तीन माह के मेले में तो सरकारी स्तर पर श्रद्धालुओं को सुरक्षा, चिकित्सा, पथ प्रकाश आदि की सुविधाएं मुहैया कराई जाती है, लेकिन इसके बाद श्रद्धालुओं की सेहत और सुविधाएं भगवान भरोसे रहती है। हालांकि मंदिर समिति के स्तर से हरसंभव सुविधाएं मुहैया कराई जाती है लेकिन स्थायी तौर पर चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधा का न होना धाम क्षेत्र के लोगों और श्रद्धालुओं के लिए भारी पड़ता है। छोटी-छोटी बीमारी के लिए भी 18 किमी. टनकपुर की दूरी नापनी पड़ती है।
पूर्णागिरि धाम में चिकित्सा की स्थायी सुविधा की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। वर्ष 2006 में बीएडीपी मद से एमआरसी (चिकित्सा राहत केंद्र) का भवन बना था। भवन खंडहर हो चुका है, लेकिन कभी किसी स्वास्थ्य कर्मी की तैनाती नहीं हुई। विभाग हमेशा स्टाफ का अभाव बता क्षेत्र के लोगों और श्रद्धालुओं की सेहत की अनदेखी करता रहा है। मंदिर समिति की ओर से फिर शासन को स्थायी स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग का प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है। - किशन तिवारी, अध्यक्ष, मां पूर्णागिरि धाम मंदिर समिति।
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मैंने हाल ही में चार्ज लिया है। मुझे अभी पूर्णागिरि धाम में चिकित्सा सुविधा की स्थिति के बारे में आइडिया नहीं है। इसके बारे में पता कर उचित कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ चंपावत।
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