चंपावत। चंपावत जिले में सरकारी अस्पताल बढ़े हैं लेकिन इलाज की सुविधा और गुणवत्ता नहीं। इसकी बड़ी वजह दूरदराज के अस्पतालों में चिकित्सकों और बड़े अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी है। जिले में चिकित्सकों का कोई पद खाली नहीं है लेकिन डॉक्टर और मरीज के अनुपात में बड़ा अंतर है। इस वक्त जिले में औसतन 2587 नागरिकों पर एक डॉक्टर है। जबकि नर्स के मामले में यह अंतर बड़ा है। इस कारण लोगों को इलाज के लिए निजी अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र होने से चंपावत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का कुछ विस्तार तो हुआ है लेकिन स्वास्थ्य की गुणवत्ता में खास अंतर नहीं आया है। जिले के पहाड़ी हिस्से में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिले में कहीं भी दिल की बीमारी का इलाज नहीं है। न सीटी स्कैन मशीन है और न ही न्यूरो से संबंधित इलाज का कोई इंतजाम है।
जिले के 21 सरकारी अस्पताल वाले जिले में 111 चिकित्सकों के पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष कुल (70 स्थायी और 44 अनुबंंधित या संविदा) 114 डॉक्टर हैं। जिले की 2.95 लाख की आबादी के हिसाब से देखें तो 2587 लोगों पर औसतन एक डॉक्टर है। 92 नर्स के सापेक्ष महज 44 हैं। यानी 6704 लोगों पर औसतन एक नर्स सेवा दे रही है। संवाद
कोट
जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सकों के सृजित पदों के सापेक्ष डॉक्टर तो हैं लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। नर्स की तैनाती के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक से आग्रह किया गया है।
डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।