टनकपुर (चंपावत)। उत्तर भारत के प्रमुख मां पूर्णागिरि मेला 15 मार्च से शुरू होगा। मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसके लिए पर्याप्त पेयजल की आवश्यकता होगी। इस बार जल संस्थान की ओर से सभी छह पेयजल स्रोतों की मरम्मत की गई है और तीन पेयजल योजनाओं के मेंटेनेंस का कार्य तेज है। धाम में जगह-जगह 15 प्याऊ भी लगाए जा रहे हैं।
तीन माह के मेले के दौरान गर्मी का मौसम भी रहता है। जल संस्थान के जेई बीएस क्वार्बी ने बताया कि मेले में दो एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है।
विभाग की ओर से धाम के पेयजल स्रोत भवानीगाड़, मांजी, ठूंगा गाड़ प्रथम, द्वितीय, कैलारी गूंठ, ठूलीगाड़ की मरम्मत कर ली है। कैलारी गूंठ, पूर्णागिरि पेयजल योजना, ठूलीगाड़ पेयजल योजना का मरम्मत कार्य अंतिम चरण में है। जल कुनिया पेयजल योजना से भी पानी उपलब्ध है।
मेले से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी। भैरव मंदिर के पास मिनी ट्यूबवेल भी चालू हैं। जेई विपिन कलौनी ने बताया कि बूम से ठूलीगाड़ तक छह काली मंदिर से मुख्य मंदिर तक तीन, भैरव मंदिर से काली मंदिर तक प्याऊ लगाए जा रहे हैं। इनमें पानी भरने के लिए दो से चार टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी। बहरहाल, मेले में पर्याप्त पेयजल को लेकर तैयारी तेज हो गई है।