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सिद्धबाबा के दर्शन के बिना पूर्णागिरि धाम की यात्रा अधूरी

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नेपाल के ब्रहमदेव के सिद्घबाबा मंदिर में दर्शन करते श्रद्घालु। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। मां पूर्णागिरि देवी के दर्शनों की पूर्णता नेपाल के ब्रह्मदेव में स्थित सिद्धबाबा में मत्था टेके बगैर नहीं होती है। देवी दर्शन के बाद बाबा सिद्धनाथ के दर्शन से ही श्रद्धालुओं की यात्रा पूरी होती है। नेपाल में स्थित बाबा सिद्धनाथ मंदिर का महात्म्य भी मां पूर्णागिरि धाम से जुड़ा हुआ है।
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लाखों श्रद्धालु हर साल मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि देवी मां के दर्शन की पूर्णता सिद्धबाबा के पूजन के बाद ही होती है। बाबा सिद्धनाथ पूर्णागिरि देवी के उपासक थे और मां के धाम के सामने शारदा नदी पार नेपाल के चूरे पहाड़ में त्रिशूल नामक स्थान पर बैठकर देवी की भक्ति करते थे। बताते हैं कि एक दिन देवी मां के शारदा में स्नान करते वक्त अनजाने में बाबा सिद्धनाथ वहां पहुंच गए। इससे क्रोधित देवी ने त्रिशूल से बाबा के शरीर के दो टुकड़े कर हवा में उछाल दिए। इनमें से एक हिस्सा शारदा नदी पार नेपाल के खल्ला नामक जगह में गिरा और दूसरा चकरपुर के बनखंडी स्थित शिव मंदिर में गिरा।
सिद्धनाथ बाबा के उनका भक्त होने का पता चलने पर देवी मां को पश्चाताप हुआ। देवी मां ने सिद्धबाबा को वरदान दिया कि मेरे (पूर्णागिरि देवी) दर्शन को आने वाले भक्तों की मनोकामना तभी पूर्ण होगी, जब वह सिद्धनाथ के दर्शन करेगा। इसी मान्यता के चलते पूर्णागिरि के दर्शन के बाद श्रद्धालु बाबा सिद्धनाथ के दर्शन के लिए नेपाल जाते हैं। इन दिनों यहां से आठ किमी दूर ब्रह्मदेव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।
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चूरे पहाड़ में है सिद्धनाथ की तपस्थली
टनकपुर (चंपावत)। बाबा सिद्धनाथ की तपस्थली मां पूर्णागिरि धाम के नजदीक नेपाल के चूरे पहाड़ में और मूल मंदिर खल्ला में है। घने जंगल, उबड़-खाबड़ पहाड़ी और बेहद दुर्गम राह होने से वहां जाना बेहद कठिन होता है। इसी वजह से ढाई दशक पहले बाबा का मंदिर विधि-विधान से ब्रह्मदेव में स्थापित किया गया है। बाबा सिद्धनाथ की पूजा नेपाल के उप्रेती ब्राह्मण कराते हैं। पुजारी गोविंद उप्रेती बताते हैं कि बाबा सिद्धनाथ का एक और नाम चंद्रेश्वर महादेव है। बताया कि उनके पूर्वज बाबा सिद्धनाथ के पुरोहित रहे थे, तब से उनका वंश बाबा सिद्धनाथ की पूजा करता आ रहा है।
श्रद्धालुओं की आमद का कारोबार पर असर
टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि मेले के चलते ब्रह्मदेव में खूब भीड़भाड़ है। कंचनपुर ब्रह्मदेव नेपाल श्री सिद्धबाबा मंदिर व्यापार मंडल अध्यक्ष मोहन देव पंत का कहना है कि सिद्धबाबा धाम के दर्शनार्थियों के चलते कारोबार में भी खूब इजाफा हो रहा है। व्यापारियों ने तीर्थयात्रियों के लिए पानी सहित कई व्यवस्थाएं की हैं।
मंदिर समिति करती है सभी व्यवस्थाएं
टनकपुर (चंपावत)। सिद्धबाब मंदिर समिति मंदिर की सभी व्यवस्थाएं करती है। समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह महता ने बताया कि समिति श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं देती है। ठहरने को धर्मशाला, विश्राम मंडप, संत महात्माओं के लिए भोजन-भंडारे की व्यवस्था की जाती है।
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