चंपावत। एक साल पहले चंपावत के पास की एक ग्राम पंचायत के एक युवा प्रधान की काम के दौरान अचानक हृदय गति रुकने से जान चली गई। इसी तरह कुछ महीने पहले 29 साल के एक युवा की भी दिल की बीमारी से मौत हो गई। दिल की बीमारी की गिरफ्त में युवाओं के आने की ये बानगी भर है।
दिल के रोगी को तत्काल इलाज मिलना जान बचाने के लिए खासा जरूरी है लेकिन चंपावत जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में दिल के रोगियों के इलाज के विशेष इंतजामात नहीं है। यहां तक कि जिले में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिला अस्पताल में नौ साल से यह पद खाली है। दिल के इलाज के लिए सिर्फ ईसीजी की सुविधा है।
हृदय रोगियों की संख्या में तेजी का आलम यह है कि एक साल में ही नौ प्रतिशत हृदय रोग के लक्षण वाले रोगी बढ़े हैं। सिर्फ एक साल में विभिन्न अस्पतालों में आए 47 हजार रोगियों में से छह हजार से ज्यादा (12.76 प्रतिशत) में हृदय रोग के शुरुआती लक्षण मिले। हृदय की जांच और इलाज के लिए इकोकार्डियोग्राफी और एंजियोग्राफी की सुविधा हल्द्वानी में है। जिला अस्पताल में गैर संक्रमण विभाग के जरिये रक्तचाप, मधुमेह और पैथोलॉजी जांच से रोग के शुरुआती लक्षण जानने का प्रयास किया जाता है।
तनाव और चिंता दिल के रोग के लिए सबसे बड़ा खतरा है। संतुलित जीवन शैली, सेहतमंद खानपान, व्यायाम, तीन माह में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने के अलावा कोरोनरी एंजियोग्राफी से हृदय रोग का पता लग सकता है। बैठकर करने वाले काम से शरीर में चर्बी और रक्तचाप के बढ़ने से हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
दिल की बीमारी से बचाव के लिए उपयोगी कदम
- सुबह की खुली हवा में कम से कम तीन किमी टहलें।
- योगासान, प्राणायाम के अलावा एरोबिक व्यायाम करें।
- चिंता, क्रोध और मानसिक तनाव से बचें।
- मोटापा और वजन को नियंत्रित रखें।
- हरी सब्जियां, मौसमी फल सहित सेहतमंद खानपान पर ध्यान दें ।
- पर्याप्त नींद और विश्राम लें, विपरीत हालात में भी तनाव पर काबू करें।
पिथौरागढ़ में सात साल से खाली है हृदय रोग विशेषज्ञ का पद
पिथौरागढ़। जिले की पांच लाख से अधिक की आबादी के दिल के इलाज के लिए सीमांत जिले में कोई डॉक्टर नहीं है। दिल का दौरा पड़ने पर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। हायर सेंटर तक पहुंचते-पहुंचते कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है। कोरोना काल के दौरान जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में काफी सुधार हुआ लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ आज तक नहीं मिल पाया।
बीडी पांडेय जिला अस्पताल में सात साल से हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। हृदय संबंधी बीमारी होने पर लोगों को इलाज कराने के लिए 210 किमी दूर हल्द्वानी, बरेली, दिल्ली या फिर देहरादून की दौड़ लगानी पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए शासन से लगातार पत्राचार कर रहा है लेकिन अब तक हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। वर्तमान में लोग फिजिशियन से इलाज कराते हैं। यदि समस्या गंभीर होती है तो मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। संवाद
कोट
जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। शासन से विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए लगातार पत्राचार किया जाता है। शासन स्तर से ही हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती संभव है। - डॉ. एचसी ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।