पीपीपी मोड के अस्पताल में मरा हुआ शिशु पैदा होने पर लोगों ने सोमवार को जमकर हंगामा करने के साथ यूनिट हेड और रेडियोलाजिस्ट का घेराव कर विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना था कि पूर्व में कराए गए अल्ट्रासाउंड में शिशु के स्वस्थ होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन जब डिलीवरी हुई तो बच्चा मरा पैदा हुआ। 20 अप्रैल को सुशीला तिवारी अस्पताल में भी मरे नवजात को गर्भ से गला काटकर निकालने को लेकर लोगों ने हंगामा किया था।
हथरंगिया के राकेश कुमार ने अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर उसे रविवार को अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसूति रोग विशेषज्ञ की देखरेख में महिला ने जब बच्चे को जन्म दिया तो वह मरा हुआ था। परिजनों के साथ ही नवीन राय, गोविंद वर्मा, सचिन जोशी, निक्कू जोशी, गोविंद बोहरा आदि लोगों को इस बात की जानकारी हुई तो वह भड़क गए और अस्पताल में जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि 13 दिन पूर्व 13 अप्रैल को जब अल्ट्रासाउंड में बच्चा सही बताया गया था। नागरिकों ने पीपीपी मोड की व्यवस्था समाप्त करने की मांग दोहराई। यूनिट हेड डा. रवि सिन्हा का कहना है कि महिला डाक्टर के कथन से गलतफहमी पैदा हो गई, बच्चा सड़ा हुआ नहीं था।
पांच सदस्यीय पैनल करेगा जांच
लोहाघाट (चंपावत)। सीएमओ डा. प्रवीण कुमार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए डाक्टरों के पांच सदस्यीय पैनल से इस मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है। सीएमओ ने फोन पर देहरादून से बताया कि वह मंगलवार तक चंपावत पहुंचने के बाद डाक्टरों का पैनल गठित करेंगे।