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Champawat: गेहूं पिसाने के लिए नेपाल की दौड़, गांव में सुविधा नहीं; 40 परिवार मानसून सीजन आते ही सहम जाते हैं

Tue, 03 Sep 2024 11:55 AM IST
हीरा मेहरा भुवन पाटनी, संवाद

सार

थपलियालखेड़ा गांव में रह रहे 40 परिवार अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। टनकपुर से छह किमी दूर इस गांव के लोग अभी भी विकास के इंतजार में हैं। 
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थपलियालखेड़ा गांव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीन ओर से नेपाल से घिरे भारत के थपलियालखेड़ा गांव की तस्वीर नहीं बदल सकी है। यहां के 40 परिवार अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। टनकपुर से छह किमी दूर इस गांव के लोग 1960 में जिले के मंच तामली क्षेत्र से सर्दियों में जानवर चुगाने के लिए आए और धीरे-धीरे यहीं बस गए। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां के ग्रामीण अभी भी विकास के इंतजार में हैं। यहां न तो सड़क सुविधा है और ना ही स्वास्थ्य का कोई इंतजाम।

बरसात के दिनों में जान जोखिम में डालकर नदी नाले पार कर या नेपाल की सड़क का उपयोग कर टनकपुर आने को विवश हैं। अनाज की कुटाई-पिसाई के लिए भी ग्रामीणों को नेपाल की शरण लेनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से वह विकास से कोसों दूर हैं। यहां के लोग आज भी सौर ऊर्जा पर निर्भर हैं। 

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ग्रामीणों ने मतदान को नहीं दिखाई थी दिलचस्पी
थपलियालखेड़ा गांव के लोगों ने इस वर्ष लोकसभा चुनाव में मतदान को दिलचस्पी नहीं दिखाई। 123 मतदाताओं में से महज 27 लोगों ने ही मतदान किया था। ग्रामीणों का कहना था कि बिजली, पानी, स्वास्थ, शिक्षा की वह लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं। जब मूलभूत सुविधाएं नहीं तो वोट का क्या फायदा। 

पांचवीं के बाद शिक्षा के लिए आना पड़ता छह किमी दूर

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सैलानीगोठ ग्राम पंचायत के गांव थपलियालखेड़ा के बच्चों को पढ़ने के लिए 12 किमी दौड़ लगानी पड़ती है। बच्चों को कक्षा छह की पढ़ाई के लिए छह किमी दूर टनकपुर आना पड़ता है और छह किमी वापस घर जाना पड़ता है। अभी तक न सड़क, न बिजली और न ही स्वास्थ्य का लाभ मिल पाया है। थपलियालखेड़ा गांव के लोग अभी भी सौर ऊर्जा पर ही निर्भर हैं। राज्य गठन के बाद महज एक प्राइमरी स्कूल खुल पाया है। बरसात में जोखिम उठा कर नाला पार करने को ग्रामीण विवश रहते हैं। - प्रीति महर, वार्ड मेंबर, सैलानीगोठ।

थपलियालखेड़ा गांव नेपाल सीमा से लगा है। यहां पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र के विकास पर काम करना चाहिए।

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- शंकर सिंह महर, थपलियाल खेड़ा, ग्रामीण।

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