कभी असाध्य माने जाने वाले क्षय रोग (टीबी) को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियां कम होने के साथ टीबी रोगियों की मृत्युदर में भी साल दर साल कमी आने लगी है। टीबी रोग पर नियंत्रण रखने के लिए चलाए जा रहे डायरेक्टली आब्जवर्ड ट्रीटमेंट विद् शार्ट कोर्स (डाट्स) के तहत रोगियों को दवाएं देने के साथ ही डाक्टरों की निगरानी में रखा जाता है। चंपावत जिला मुख्यालय में वर्ष 2004 में क्षय नियंत्रण केंद्र खोला गया। जिसके माध्यम से डाट्स कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। बीते पांच सालों में जहां बलगम की जांच कराने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है तो इस दौरान करीब 78 रोगियों को मृत अथवा डिफाल्टर घोषित किया गया है।
जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ. केसी ठाकुर का कहना है कि ढाई लाख से अधिक की आबादी वाले चंपावत जिले में बीते पांच वर्षों में कुल 6765 लोगों के बलगम जांच के लिए आए। इनमें से 1088 रोगियों को पंजीकृत कर 765 रोगियों का उपचार किया गया। जबकि 245 रोगी अभी उपचाराधीन हैं। उन्होंने बताया कि डाट्स के बाद चलने वाले एमडीआर टीबी रोगियों में वर्ष 2014 से फरवरी 2017 तक कुल 19 रोगी पंजीकृत किए गए। इसमें से आठ रोगियों का उपचार करने के साथ सात रोगी उपचाराधीन हैं। जबकि दो रोगियों की मौत हुई है। उनका कहना है कि पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत टीबी रोगियों की खोज का अभियान बाकायदा जारी है। चिन्हित रोगियों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है।
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वर्ष कुल बलगम जांच पंजीकृत रोगी, उपचारित रोगी, मृत रोगी
2013 1397 277 251 26
2014 1568 252 230 23
2015 1795 273 252 21
2016 1791 246 238 08
2017 0214 039 039 00
टीबी की समाप्ति के लिए सभी एकजुट हो
चंपावत। विश्व टीबी दिवस पर इस बार की थीम यूनाइटेड टू एंड टीबी (टीबी की समाप्ति के लिए सभी एकजुट हो) रखा गया है। जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. केसी ठाकुर ने बताया कि जिला क्षय रोग नियंत्रण कार्यालय की ओर से 24 मार्च को उदयन इंटरनेशनल स्कूल में एक बजे से विचार गोष्ठी और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस बार की थीम के मुताबिक प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।