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तीसरे दिन भी नहीं खुल पाया टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच

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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्वांला में मलबा हटाती मशीन। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग खुलने का इंतजार लंबा हो रहा है। स्वांला मंदिर के नजदीक ऊंची पहाड़ी दरकने से सोमवार से बंद सड़क के 60 मीटर हिस्से से मलबा हटाना चुनौती बन रहा है। दो दिन में इस स्थान से 140 मीटर हिस्से से मलबे को हटाया जा चुका है, लेकिन हल्की बारिश और बीच-बीच में मलबा गिरने से काम में अवरोध भी हो रहा है। बुधवार को मलबा हटाने में लगे एक लोडर वाहन पर पत्थर गिरा, जिसमें ऑपरेटर बाल-बाल बच गया।
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डीएम विनीत तोमर का कहना है कि मलबे की स्थिति को देखते हुए सड़क खुलने में एक से दो दिन और लग सकते हैं। टनकपुर और चंपावत के बीच वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकी गई है। इस मार्ग पर रीठा साहिब-सूखीढांग होकर वाहनों का आवागमन हो रहा है। इसमें 75 किमी के बजाय 135 किमी का फासला तय करना पड़ रहा है जबकि हल्द्वानी की ओर जाने वाले वाहनों को देवीधुरा होकर भेजा जा रहा है। बुधवार को देवीधुरा होकर छह (दिल्ली, देहरादून के लिए एक-एक और हल्द्वानी के लिए चार) बसों को चलाया गया। टनकपुर से लोहाघाट डिपो की एक-एक बस गुरुग्राम, दिल्ली, देहरादून और बरेली के लिए चलाई गई। एनएच खंड के ईई एलडी मथेला सहित इंजीनियरों और शिवालया कंपनी की टीम पांच मशीनों के जरिये मलबा हटाने में जुटी है। दो दिन में सड़क के 200 मीटर हिस्से में से 140 मीटर में से मलबा साफ कर लिया गया है। बाकी जगह से मलबे को हटाने में बारिश और धुंधनुमा मौसम समेत पहाड़ी से गिर रहे पत्थर आड़े आ रहे हैं। वहीं बुधवार को इंजीनियरों ने पिछले महीने भूस्खलन से खतरे की जद में आए स्वांला गांव के इलाके का भी मुआयना किया।
चंपावत स्टेशन में सन्नाटा, लोहाघाट डिपो को छह लाख का झटका
चंपावत/लोहाघाट। एनएच बंद होने से रोडवेज को सोमवार से छह लाख रुपये का झटका लग चुका है। एजीएम एनके गौतम ने बताया कि बुधवार को छह (दिल्ली की तीन, देहरादून की दो और ऋषिकेश की एक) बसों का संचालन नहीं हो सका। वहीं चंपावत रोडवेज स्टेशन में बसों की आवाजाही बंद होने से सन्नाटा छाया है। बसों की आवाजाही बंद होने से रोडवेज की कैंटीन बंद होने के साथ ही दोनों गेट भी बंद किए गए हैं।
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160 के बजाय 1700 रुपये चुका तीन दिन बाद घर पहुंचे बुजुर्ग पूर्व फौजी
चंपावत। 65 साल के पूर्व सैनिक रेवाधर भट्ट को टनकपुर से महज 54 किमी दूर अपने गांव स्वांला पहुंचने में तीन दिन लग गए। राखी के लिए 20 अगस्त को बेटी के घर टनकपुर गए पूर्व किमी को घर पहुंचने के लिए 160 रुपये के बजाय 1700 रुपये खर्च करने पड़े। 54 किमी के बजाय 271 किमी का सफर करना पड़ा। भट्ट बताते हैं कि 23 अगस्त को टनकपुर से स्वांला के लिए चले, तो सड़क बंद होने से टनकपुर लौटे। अगले दिन 24 अगस्त को काफी देर तक सड़क खुलने का इंतजार किया। सड़क न खुलने की जानकारी मिलने पर दिन में ही हल्द्वानी होकर गए। आगे वाहन न मिलने से हल्द्वानी होटल में रुकना पड़ा। पूर्व सैनिक हल्द्वानी से चंपावत होकर बुधवार शाम स्वांला पहुंचे।
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