टनकपुर (चंपावत)। कुमाऊं के सबसे बड़े रोडवेज के टनकपुर डिपो के बसों का अभाव है। डिपो के अधिकारियों को लंबे रूटों पर समयावधि पूरी कर चुकी पुरानी बसें चलानी पड़ रही हैं। बसों की मरम्मत में के लिए भी तकनीकी कर्मियों की कमी है। निगम के अधिकारियों का मानना है कि तत्काल 20 नई बसें मिल जाएं तो पहाड़ और मैदान में बेहतर यात्री सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए अगले कुछ माह में प्रदेश को मिलने वाली 130 बसों में से डिपो को मिलने वाली बसों पर सबकी निगाह है।
टनकपुर डिपो के बेड़े मूें 105 बसें हैं। इनमें अनुबंध की 20 बसें भी शामिल हैं। पुरानी बसों के रास्ते में खराब होने से यात्रियों को हो रही दिक्कत मामले सामने आ रहे हैं। एआरएम संचालन पवन मेहरा ने बताया कि निगम के बेड़े की करीब 20 बसें पुरानी हो चुकी हैं। इनके स्थान पर नई बसों की जरूरत है। अगले एक-दो माह में निगम को 130 नई बसें मिलने की उम्मीद है, इनमें डिपो को भी पर्याप्त बसें मिलने की संभावना है। मैदानी क्षेत्र के चंडीगढ़, शिमला, देहरादून, दिल्ली, लखनऊ, कानपुर के अलावा पहाड़ के लिए बेरीनाग और धारचूला के लिए बसों की कमी है।