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नियम तोड़ने पर करें कठोर कार्रवाई ः जिलाधिकारी

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चंपावत में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक लेते डीएम विनीत तोमर। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। लगातार हो रहे सड़क हादसे से प्रशासन के माथे पर बल पड़ रहा है। मंगलवार को सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में डीएम विनीत तोमर ने दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के साथ सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए जरूरी कदम उठाने की हिदायत दी। कहा कि लगातार अभियान चलाने के साथ नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।
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डीएम ने एनएच और राज्य मार्गों सहित सभी सड़कों से मलबा हटाने, सड़क किनारे के लटके पेड़ों और पत्थरों को हटाने सहित पूरी तरह ठीक करने के कार्यदायी एजेंसी को निर्देश दिए। उन्होंने यातायात नियमों के अनुरूप साइन बोर्ड लगाकर व्यवस्थाएं ठीक की जाएं।
हादसे के शिकार लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया। पूर्णागिरि मेले में भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी करने की हिदायत दी गई। बैठक में एसपी देवेंद्र पींचा, एडीएम एससी द्विवेदी, एसडीएम हिमांशु कफल्टिया, एआरटीओ सुरेंद्र कुमार, सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल, एसीएमओ डॉ. श्वेता खर्कवाल, सीओ अशोक कुमार सिंह, लोनिवि के ईई एमसी पांडे, बीएस भंडारी, एनएच खंड के ईई एमसी पांडेय, डीडीएमओ मनोज पांडेय आदि थे।
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उठाए जाएंगे ये कदम:
1.जर्जर और जोखिम वाली सड़क को ठीक किया जाएगा। जरूरत के मुताबिक गति अवरोधक और रंबल स्ट्रीप लाए जाएंगे।
2.क्षमता से अधिक सवारी बिठाने और निर्धारित गति से अधिक वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई।
3.नियमित जांच कर नशेड़ी चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने।
4.खतरे वाली सड़कों के आसपास एंबुलेंस की तैनाती।
5.धूल से निजात पाने के लिए आबादी वाली जगहों पर पानी का छिड़काव किया जाएगा।
6.नियमति अंतराल में परिवहन, पुलिस और प्रशासन का संयुक्त अभियान चलाया जाएगा।
चिंताजनक : तीन साल से भी ज्यादा हादसे हो गए सिर्फ साढ़े तीन माह में
चंपावत। साल 2022 का अब तक का वक्त सड़क दुर्घटना के मद्देनजर खासा चिंताजनक रहा है। इस साल साढ़े तीन माह (12 अप्रैल तक) से भी कम समय में जितने लोगों ने दम तोड़ा, उतनी मौतें बीते तीन साल में भी नहीं हुई हैं। इस वर्ष अब तक 26 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि 31 लोग घायल भी हुए हैं।
इस साल 21 फरवरी को ककनई में सबसे दर्दनाक हादसा हुआ। बरात की इस जीप में 14 लोगों ने दम तोड़ा। इसके बाद परिवहन विभाग से लेकर पुलिस और प्रशासन ने कई अभियान चलाए लेकिन दुर्घटनाओं का आंकड़ा कम नहीं हुआ। अप्रैल महीनेे में ही सात लोगों की मौत सड़क हादसों में हो चुकी है। जबकि बीते तीन वर्षों में कुल 25 लोगों की मौत हुई। जीप हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवरलोडिंग, ओवरस्पीड के अलावा लापरवाही से वाहन चलाना, नशा और खराब सड़क है। एआरटीओ सुरेंद्र कुमार का कहना है कि स्टाफ की कमी के बावजूद नियमित अभियान चलाकर वाहन दुर्घटनाओं पर रोकथाम के लिए प्रयास किया जाएगा।
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पिछले तीन वर्षों में हुए सड़क हादसे:
वर्ष- मृतक- घायल
2019: 19- 41
2020: 02- 08
2021: 04- 14
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