सतीश जोशी ‘सत्तू’
चंपावत। केंद्र सरकार की पहल पर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन निर्माण के लिए फाइनल सर्वे शुरू हो गया है। टनकपुर से लोहाघाट तक राष्ट्रीय राजमार्ग (बारहमासी सड़क) के समानांतर रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। नोएडा उत्तर प्रदेश की स्काईलार्क कंपनी की ओर से चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर, चंपावत के बीच रेल लाइन निर्माण के लिए सर्वे किया जा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से सर्वे कार्य के लिए 28.95 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। आजादी से पहले ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1911-12 में पहली बार टनकपुर से बागेश्वर तक महाकाली नदी के किनारे सर्वे किया गया था जबकि आजादी के बाद वर्ष 2006-07 में केंद्र सरकार की ओर से पहली बार प्रारंभिक सर्वे कराया गया था।
क्षेत्र में पंचेश्वर बांध के प्रस्तावित होने के कारण महाकाली नदी के किनारे रेल लाइन निर्माण के लिए असमंजस था, लेकिन रेल लाइन निर्माण के लिए फाइनल सर्वे शुरू होने से महत्वाकांक्षी रेल परियोजना के पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है। स्काईलार्क संस्था के तकनीकी अधिकारी योगेश कन्नौजिया और शंकर लाल चौधरी ने बताया कि वन एवं पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचाते हुए टनकपुर से लोहाघाट तक बारहमासी सड़क के समानांतर से रेल लाइन का सर्वे किया जा रहा है।
रेल लाइन का 80 फीसदी हिस्सा टनल से गुजरेगा
चंपावत। टनकपुर-बागेश्वर के बीच में 154.58 किमी लंबी ब्रॉडगेज रेल लाइन का 80 फीसदी हिस्सा टनल (सुरंग) से होकर गुजरेगा। स्काईलार्क संस्था के अभियंता सलमान अली, सुबोध कुमार, अंकित श्रीवास्तव के अनुसार महाकाली नदी के किनारे पेड़ों की संख्या अधिक होने के कारण रेल लाइन में टनल निर्माण के लिए सर्वे किया जा रहा है।
तीन जिलों में बहेगी विकास की बयार
चंपावत। बहुप्रतीक्षित टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के निर्माण से चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर जिलों में विकास तेज होगा। टनकपुर-बागेश्वर रेल पथ निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष गंगा गिरि गोस्वामी के अनुसार समिति के लंबे संघर्ष के बाद रेल लाइन के लिए फाइनल सर्वे का कार्य शुरू हो गया है। रेल लाइन के निर्माण से पर्वतीय क्षेत्र के तीन जिलों में विकास के नए आयाम स्थापित होंगे।