चंपावत। चंपावत कैंपस में इस बार भी युवाओं को एमकॉम की पढ़ाई के लिए बाहरी जिलों की दौड़ लगानी पड़ेगी। कैंपस में एमकॉम की पढ़ाई नहीं होने के चलते छात्र-छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विद्यार्थियों का कहना है कि एमकॉम का संचालन कैंपस में होता है तो निश्चित तौर पर छात्र संख्या में भी वृद्धि होगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अधिक लाभ मिलेगा। एमकॉम न होने के कारण बीकॉम लेने वाले छात्र-छात्राओं को कई बार प्रवेश लेने से पहले सोचना पड़ता है।
चंपावत कैंपस में एमकॉम की पढ़ाई नहीं होने से छात्र-छात्राओं को बीकॉम के बाद लोहाघाट, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल जाना पड़ता है। इस कारण कई छात्र बीकॉम की पढ़ाई भी बाहरी जिलों से ही करना पसंद करते हैं।- मुकेश सिंह महर, छात्रसंघ अध्यक्ष, चंपावत कैंपस।
चंपावत कैंपस में एमकॉम की पढ़ाई न होना छात्र-छात्राओं के साथ खिलवाड़ है। आखिर कब तक बीकॉम की पढ़ाई के बाद बाहरी जिलों की दौड़ लगानी पड़ेगी। विश्वविद्यालय को छात्र-छात्राओं की इस मांग को जल्द पूरा करना चाहिए।- संदीप रावत, छात्रनेता, चंपावत कैंपस।