चंपावत। जिले में पहली बार रेशम के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शहतूत की खेती की कवायद शुरू की गई है। जिसके तहत रेशम विकास विभाग की ओर से पहली बार चंपावत जिले के 137 स्थानों में काश्तकारों के माध्यम से शहतूत के पौधे रोपे जा रहे हैं। जिले के चंपावत और पाटी विकासखंड की चार ग्राम पंचायतों में 125 काश्तकारों के माध्यम से शहतूत की खेती शुरू कर दी गई है। चालू वित्तीय वर्ष की जिला योजना में पहली दफा रेशम की खेती को बढ़ावा देने के लिए 8.50 लाख की राशि आवंटित की गई है। जिसमें अब तक 2.80 लाख रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं। संवाद
फोटो 15 सीपीटी 06 पी, 07 पी।
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शहतूत की नियमित खेती के लिए बनाई जाएगी नर्सरी
चंपावत। जिले में रेशम विकास विभाग की ओर से शहतूत की नियमित खेती के लिए नर्सरी तैयार की जाएगी। डीएम नवनीत पांडे के निर्देश पर विभाग की ओर से नर्सरी के लिए भूमि चिन्हिकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। रेशम विभाग के सहायक प्रभारी जीवन खर्कवाल ने बताया कि जल्द ही जिले में शहतूत की नर्सरी तैयार कर काश्तकारों को पौध वितरित किए जाएंगे। संवाद
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जिले में कहां-कहां की जा रही है शहतूत की खेती
विकासखंड ग्राम पंचायत काश्तकारों की संख्या
चंपावत चौड़ाख्याली 46
पाटी मछियाड़ 30
पाटी सकदेना 24
पाटी टाक बलवाड़ी 25
कोट
चंपावत जिले में रेशम उत्पादन के लिए पहली बार चार स्थानों में शहतूत की खेती शुरू की गई है। अगले वित्तीय वर्ष में अन्य स्थानों के काश्तकारों को भी शहतूत की खेती से जोड़ा जाएगा।
दिवस भट्ट, प्रभारी अधिकारी, रेशम विभाग, चंपावत।