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पूर्णागिरि धाम मंदिर समिति के चुनाव को लेकर शुरू हुई सरगर्मी

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टनकपुर (चंपावत)। मां पूर्णागिरि धाम को ट्रस्ट बनाने की कवायद चार माह से ठंडे बस्ते में है। चार माह पहले कमेटी गठित करने के सिवाय कोई कवायद आगे नहीं बढ़ पाई है। हालांकि कमेटी ने जागेश्वर धाम की तर्ज पर पूर्णागिरि को ट्रस्ट बनाने के लिए जागेश्वर ट्रस्ट के अध्ययन का फैसला लिया है, लेकिन चार माह बाद भी अध्ययन की कवायद शुरू नहीं हो पाई है।
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मां पूर्णागिरि धाम को ट्रस्ट बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी राजू ने करीब ढाई दशक पूर्व सबसे पहले ट्रस्ट के लिए संघर्ष शुरू किया था, लेकिन पुजारियों के विरोध के चलते उनकी यह मांग अब भी पूरी नहीं हो सकी। टनकपुर निवासी नरेश सकारी की जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने मई 2019 में सरकार को तीन माह के अंदर ट्रस्ट पर अपनी राय बताने के निर्देश दिए थे। तब से शासन स्तर पर ट्रस्ट की कवायद चल रही है। चार माह पूर्व मार्च में ट्रस्ट बनाने की सैद्धांतिक सहमति देते हुए सरकार ने इसके परीक्षण और भावी रूपरेखा के लिए समिति गठित करने के आदेश जारी किए थे, जिसके बाद ट्रस्ट बनाने की कवायद शुरू हुई। एडीएम टीएस मर्तोलिया की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाई गई, लेकिन इस बीच तीरथ सिंह सरकार के देवस्थानम बोर्ड भंग करने के फैसले का पूर्णागिरि ट्रस्ट की कार्रवाई पर भी असर पड़ा। तब से ट्रस्ट की कवायद फिलहाल ठंड बस्ते में है। (संवाद)
कोट ::::: पूर्णागिरि ट्रस्ट के लिए सरकार के आदेश पर डीएम ने एडीएम टीएस मर्तोलिया की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें जिला पर्यटन अधिकारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी और एसडीएम श्री पूर्णागिरि शामिल हैं। फिलहाल कोरोना महामारी की वजह से ट्रस्ट के लिए कोई कार्रवाई नहीं आगे नहीं बढ़ सकी है।
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- हिमांशु कफल्टिया, एसडीएम श्री पूर्णागिरि तहसील, टनकपुर।
पूर्णागिरि धाम मंदिर समिति के चुनाव की तैयारी शुरू
टनकपुर (चंपावत)। मां पूर्णागिरि धाम मंदिर समिति का पांच वर्षीय कार्यकाल इसी साल अक्तूबर में पूरा हो रहा है। नए चुनाव के लिए धाम के पुजारियों के बीच सरगर्मी शुरू हो गई है।
पूर्णागिरि धाम की व्यवस्थाओं में मंदिर समिति की अहम भूमिका रहती है। हर साल होली के बाद चैत्र नवरात्रों में लगने वाले तीन माह के मेले की व्यवस्थाओं के निर्धारण में प्रशासन के साथ मुख्य भूमिका निभाने के अलावा मेले के बाद वर्षभर की व्यवस्था की जिम्मेदारी मंदिर समिति निभाती है। वर्ष 2017 से पहले धाम के पुजारी आपसी सहमति से मंदिर समिति की कार्यकारिणी तय करते थे, लेकिन 2017 में चुनाव को लेकर पुजारियों के दो गुटों में बंटने से पहली बार मतदान से चुनाव की नौबत आई। बायलॉज के मुताबिक समिति का कार्यकाल पांच साल तय है। जो चार माह बाद अक्तूबर में खत्म हो रहा है। इसलिए पुजारियों के बीच नई कार्यकारिणी के चुनाव की सरगर्मी शुरू हो गई है। हालांकि अभी चुनाव की रूपरेखा और तिथि तय नहीं है, लेकिन अध्यक्ष और अन्य पदों के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक पुजारी अपना माहौल बनाने में जुट गए है। समिति के अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि समिति का कार्यकाल अक्तूबर में खत्म हो रहा है। जल्द ही पुजारियों की आम बैठक आयोजित कर नए चुनाव की रूपरेखा तय की जाएगी।
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