चंपावत। नेपाल सीमा से लगा चंपावत जिला सामरिक लिहाज से खासा अहम है लेकिन यहां की जीवनरेखा यानी सड़कों की बदहाली, सड़क निर्माण के काम में देरी और कमतर गुणवत्ता लोगों को झटका दे रही है। सीमांत की टनकपुर-जौलजीबी सड़क के दूसरे पैकेज (चूका से रुपालीगाड़) में अगस्त 2017 से दिसंबर 2020 तक निर्माण कार्य रुका रहा।
30 किमी लंबी सूखीढांग-डांडा-मीनार सड़क 21 से अधिक गांवों को जोड़ने वाली है लेकिन इसके डामरीकरण की प्रक्रिया सीएम के फरवरी 2020 के एलान के बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। पाटी ब्लॉक में देवाल से ग्राम पंचायत बिगराकोट के रीठा गांव को जोड़ने वाले पुल का काम बजट मिलने के बावजूद दो साल से बंद है। इन विसंगतियों से लोगों की परेशानी बढ़ी है। आवाजाही में अधिक समय और किराया लग रहा है। आवाजाही में खतरा भी बढ़ गया है।
कई कारणों से कुछ सड़कों के काम में देरी हुई है। निविदा विवाद और जांच की वजह से सीमांत की टनकपुर-जौलजीबी सड़क के दूसरे पैकेज में तीन साल की देरी हुई। आगणन में गड़बड़ी सहित इस सड़क में हुई धांधली के मामले को विधानसभा में भी उठाया।
देवाल से रीठा गांव को जोड़ने वाले पुल के काम में देरी की वजह कोरोना काल में गैस वेल्डिंग के लिए ऑक्सीजन एसिटिलीन की उपलब्धता न होना रहा। अब गैस वेल्डिंग मशीन और अन्य सामग्री मिल गई है। कार्यदायी संस्था पीएमजीएसवाई खंड को रीठा सहित दो अन्य पुलों का काम भी दिसंबर तक पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। - पूरन सिंह फर्त्याल, विधायक, लोहाघाट।
क्षेत्र में पुल और सड़कों के काम की गति खासी सुस्त है। देवाल से रीठा गांव को जोड़ने वाले पुल में काम शुरू करवाने के लिए कई बार आवाज भी उठाई, लेकिन अफसरशाही की ढिलाई से काम शुरू नहीं हो सका है। वैसे भी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की मंजूर सड़कों और कामों को ही भाजपा सरकार आगे नहीं बढ़ा पा रही है। - खुशाल सिंह अधिकारी, कांग्रेस नेता, लोहाघाट।
सूखीढांग-डांडा-मीनार सड़क के डामरीकरण की घोषणा पिछले साल फरवरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने की थी। कोरोना संक्रमण के दौर में कुछ देरी जरूर हुई। अब कोरोना की स्थिति सुधरने के बाद फिर से तेजी से काम करने की हिदायत दी गई है। डामर का जिम्मा लोनिवि के बजाय पीएमजीएसवाई को दिया गया है। जल्द ही बजट उपलब्ध करवाकर डामरीकरण का काम पूरा कराया जाएगा। - कैलाश गहतोड़ी, विधायक, चंपावत।
सूखीढांग-डांडा-मीनार सड़क की कटिंग कांग्रेस सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है। पांच साल पहले ये कटिंग पूरी होने के बाद छोटे वाहनों के लिए आवाजाही भी शुरू हो गई थी। इसके बावजूद डामरीकरण का काम शुरू नहीं हो सका। ये सुस्ती भाजपा सरकार और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का एक उदाहरण भर है। - हेमेश खर्कवाल, पूर्व विधायक, चंपावत।