चंपावत। एक अदद स्वतंत्र अभियंता नहीं मिल पाना मुख्यमंत्री द्वारा एलान की गई घोषणा पर भारी पड़ रहा है। इस वजह से जून 2015 में शिलान्यास के बावजूद मां पूर्णागिरि धाम में रज्जुमार्ग (रोपवे) का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। दिसंबर 2016 तक पूरा होने वाला रज्जुमार्ग का काम अभी शुरू भी नहीं हो सका है।
रज्जुमार्ग पर विशेषज्ञता रखने वाले ब्रिडकुल (ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) को स्वतंत्र अभियंता की व्यवस्था करनी थी, लेकिन अभी तक वह इसकी व्यवस्था नहीं करा सका। अब डीएम ने लोक निर्माण विभाग के जरिये स्वतंत्र अभियंता की व्यवस्था कराने के लिए शासन को पत्र भेजा है। सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मोड में 35 करोड़ रुपये से हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबे रज्जुमार्ग के लिए प्रदेश सरकार ने केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के साथ सहमति पत्र (एमओयू) किया था। 15 जून 2015 को रज्जुमार्ग का तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया था। शिलान्यास के बाद वन अनापत्ति, बिजली संयोजन और कुछ छिटपुट काम हुए।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि 2018 में वन भूमि हस्तांतरण के अलावा भारतीय एजेंसियों के अलावा आस्ट्रिया के विशेषज्ञों से सुरक्षा के मद्देनजर मृदा परीक्षण भी कराया गया। लेकिन स्वतंत्र अभियंता नहीें मिल पाने से रज्जुमार्ग का काम शुरू नहीं हो सका है।
अड़चन दूर करने को पत्र भेजेंगे डीएम
चंपावत। रज्जुमार्ग के काम में हो रही हीलाहवाली पर डीएम विनीत तोमर ने नाराजगी जताई है। इसे लेकर सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने काम शुरू कराने के रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर कराने के पर्यटन विभाग को निर्देश दिए। साथ ही ब्रिडकुल की ओर से स्वतंत्र अभियंता उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद लोक निर्माण विभाग के जरिये स्वतंत्र अभियंता की व्यवस्था करने के लिए शासन को पत्र भेजने की बात कही है। इधर ब्रिडकुल के अधिकारियों का कहना है कि रज्जुमार्ग के स्वतंत्र अभियंता के लिए पिछले साल तीन बार निविदाएं निकाली गई थीं। लेकिन इसके बावजूद स्वतंत्र अभियंता नहीं मिल सका।
रज्जू मार्ग बनने से आसानी से हो सकेंगे देवी के दर्शन
चंपावत। रज्जुमार्ग बनने से देवी के दर्शन आसानी से हो सकेंगे । इस समय श्रद्धालुओं को भैरव मंदिर तक जीप और उसके बाद मां पूर्णागिरि मुख्य मंदिर तक तीन किमी पैदल जाना होता है। लेकिन रज्जुमार्ग के बनने से मां के दर्शनों के लिए पैदल फासला तय नहीं करना होगा। मुख्य मंदिर तक तीन किमी पैदल चढ़ाई पार करने में सवा घंटा लगता है। जबकि रज्जुमार्ग से ये दूरी दस मिनट में तय हो जाएगी। समय बचने के अलावा पहाड़ में चलने में असमर्थ लोग, बड़े-बुजुर्ग, छोटे बच्चे, बीमार और दिव्यांग भी आसानी से दर्शन कर सकेंगे।