चंपावत। ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा में 12 जून को आठ किलो चरस तस्करी मामले में चंपावत पुलिस के एक सिपाही की संदिग्ध भूमिका अब और अधिक संदेह पैदा कर रही है। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि दरोगा कैलाश चंद्र के नेतृत्व में किच्छा से पुलिस की टीम सोमवार को चंपावत पहुुंची। लेकिन संपर्क नहीं होने से यह टीम कोतवाली के संदिग्ध सिपाही से पूछताछ नहीं कर सकी।
पूछताछ से बचने को कोतवाली में तैनात यह सिपाही रविवार सुबह से गायब है और उसका मोबाइल नंबर भी बंद है। किच्छा पुलिस ने आठ किलो चरस के साथ पिथौरागढ़ पुलिस के दो सिपाहियों सहित कुल चार लोगों को दबोचा था। आरोपियों ने पूछताछ में चंपावत कोतवाली में तैनात एक पुलिस कर्मी से चरस लाने की बात उजागर की थी। कोतवाल धीरेंद्र कुमार ने बताया कि सिपाही दूसरे दिन सोमवार को भी ड्यूटी पर नहीं आया और नहीं उसके द्वारा किसी तरह के अवकाश की अनुमति ली गई है। वहीं चरस तस्करी के आरोपी पिथौरागढ़ में तैनात दो पुलिस कर्मियों को चंपावत के एक होटल में 11 जून की रात को ठहराने के लिए ले गए। चंपावत के एक पुलिस कर्मी से भी किच्छा की पुलिस टीम ने सोमवार को पूछताछ की।
यातायात पुलिस का यह कर्मी होटल के सीसीटीवी में नजर आ रहा था। अलबत्ता सूत्र बताते हैं कि यह यातायात कर्मी कोतवाली के संदिग्ध माने जा रहे पुलिस कर्मी के कहने पर होटल तक गया था। इस यातायात कर्मी का चरस की लेनदेन से प्रथम दृष्ट्या संबंध नजर नहीं आ रहा है। इसके अलावा होटल के एक कर्मी से रात रुके आरोपी पुलिस कर्मियों के बारे में जानकारी ली गई। एसपी का कहना है कि कोतवाली में तैनात सिपाही की चरस तस्करी में लिप्तता सामने आने पर निलंबित करने के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।