चंपावत के बाराकोट ब्लॉक मुख्यालय का ये घटनाक्रम बेहद डरावना है और कोरोना से भी ज्यादा खौफ पैदा करता है। 77 साल का एक बुजुर्ग एक बैंक के नजदीक चक्कर आने से गिर गया और करीब 12 मिनट बाद वहीं उसी हाल में रहा।
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इस दौरान उन्हें आसपास के लोगों की ओर से मदद तो दूर किसी ने छूने की जहमत तक नहीं उठाई। कुछ ही देर में बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। बुजुर्ग के परिजनों का कहना है कि उनके परिवार में उनके कोई भी कोरोना संक्रमित नहीं है। अगर वक्त पर मदद की होती तो शायद उनकी जिंदगी बच जाती।
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ढुंगाजोशी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक नवीन जोशी 13 मई की सुबह साढ़े दस बजे बैंक के काम से गांव से पांच किमी दूर पैदल ही बाराकोट पहुंचे। बैंक से काम निपटा कर वह लौट गए, लेकिन रास्ते से वह पासबुक में इंट्री कराने को फिर बैंक शाखा पहुंचे। इस बीच, बैंक के नजदीक वह एकाएक जमीन पर गिर गए।
करीब 12 मिनट तक वह तड़पते रहे। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों ने न तो पानी पिलाया और न ही कोई उनके पास फटका। बुजुर्ग के अचेत होने से पहले आपात सेवा 108 एंबुलेंस को कुछ लोगों ने कॉल जरूर किया। लोगों का कहना था कि कोरोना काल में संक्रमण के डर से वे पास नहीं गए।
कुछ देर बार बुजुर्ग शिक्षक के भतीजे कैलाश जोशी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आपात सेवा 108 के जिला प्रभारी भास्कर शर्मा ने बताया कि बाराकोट अस्पताल ले जाते वक्त ही बुजुर्ग की मौत हो गई थी।
कोरोना काल में सावधानी और सामाजिक दूरी बरती जानी चाहिए, लेकिन ऐसा करते वक्त सामान्य मानवीय मूल्यों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। बाराकोट में हुए मामले में आसपास के लोगों को तुरंत 108 सेवा को कॉल करने के अलावा मास्क पहने और हाथ में दस्तानों के साथ बुजुर्ग की मदद करनी चाहिए थी। इससे बीमार व्यक्ति का हौसला बढ़ता और हिम्मत जागती।
- डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ, चंपावत