चंपावत। जिले को नई पर्यावरणीय पहचान देने वाले कॉर्बेट ट्रेल का काम शुरू होने में अड़चन आई है। ट्रेल के काम में परामर्श देने के लिए चयनित परामर्शदाता एजेंसी को शासन के निर्देश के बाद हटा दिया गया है। अब इको टूरिज्म में अति विशेषज्ञता रखने वाली एजेंसी को परामर्शदाता एजेंसी के रूप में चयनित करने के लिए नए सिरे से निविदा होगी। ट्रेल के बनने से चंपावत जिले में वन्यजीव सुरक्षा के प्रति न केवल जागरूकता बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण संवर्द्धन और स्वरोजगार के मौके भी मिलेंगे।
मशहूर शिकारी जिम कॉर्बेट के नाम से चंपावत जिले को नई पहचान देने के लिए कॉर्बेट ट्रेल को मंजूरी मिली थी। 7.29 करोड़ की इस ट्रेल का मकसद पुरानी वन्य विरासतों को मूल स्वरूप से छेड़छाड़ किए बगैर संवारना है। वन्य और पर्यावरण प्रेमी सैलानियों के आने पर स्वरोजगार के मौके दिए जाएंगे। इस कार्य में परामर्श देने के लिए लोनिवि की ओर से तय परामर्शदाता एजेंसी को बदल अति विशेषज्ञता वाली एजेंसी रखने के शासन के निर्देश के बाद अब नई एजेंसी तय की जाएगी। हॉफ (वन बलों के प्रमुख) की अध्यक्षता में गठित पारिस्थितिकी पर्यटन (इको टूरिज्म) कमेटी इस काम के लिए दिशा निर्देश दे रही है।
कॉर्बेट से जुड़े वन क्षेत्र, डाक बंगले और प्रमुख स्थानों को मूल वास्तुकला को बनाए रखते हुए मरम्मत करने, शारदा नदी के किनारे के स्थानों को विकसित करने, सात ट्रेकिंग रूट, लघु वृत्तचित्र, साइन बोर्ड, कॉर्बेट और वन्य जीव संरक्षण से संबंधित पुस्तकालय जैसे 12 से अधिक काम कराए जाएंगे। संवाद
युवाओं को हुनरमंद बनाएगी इको डेवलपमेंट कमेटी
चंपावत। कॉर्बेट ट्रेल के तहत चूका में इको डेवलपमेंट कमेटी गठित की गई है। ग्रामीण युवाओं को कॉर्बेट से जुड़े आसपास के स्थानों के लिए गाइड का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे होने वाली आय स्थानीय ग्रामीणों की सेहत और पढ़ाई में खर्च की जाएगी। वन्य जीवों के अवैध शिकार और शारदा नदी में अवैध मछली पकडऩे के लिए कमेटी और वन विभाग के बीच अनुबंध होगा।
कोट
जिम कॉर्बेट ट्रेल के लिए 7.29 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को शासन को भेजा गया है, लेकिन शासन ने कार्यदायी एजेंसी लोनिवि को नई परामर्शदात्री एजेंसी से ट्रेल के निर्माण के लिए परामर्श लेने के निर्देश दिए हैं। नई परामर्शदात्री एजेंसी के निर्धारण के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
- आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत।