चंपावत के पूल्ड हाउस में अपने हाथों से गंगा दशहरा द्वार पत्र तैयार करती बालिकाएं।
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चंपावत। कोरोना के कारण जहां बीते डेढ़ साल से स्कूली बच्चे घरों में ही कैद होकर रह गए हैं, वहीं इससे बच्चों को अपनी पुरातन संस्कृति से रूबरू होने का मौका भी मिल रहा है। रचनात्मक कार्यों में रुचि रखने वाले स्कूली बच्चों ने अवकाश के समय का सदुपयोग कर अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजा है। इस दौरान बच्चों ने अपने हाथों से रंगीन गंगा दशहरा द्वार पत्र बनाने में रुचि ली है।
पहले गंगा दशहरा पर्व पर ब्राह्मण कागज पर हाथों से द्वार पत्र बनाते थे। बाद के तकनीकी युग में प्रिंटिंग प्रेस से छपे गंगा दशहरा पत्र प्रचलन में आ गए लेकिन आजकल जिला मुख्यालय की पूल्ड हाउस कॉलोनी में रहने वाली कक्षा नौ की प्रांजलि लोहनी और कक्षा पांचवीं की चित्रांशी लोहनी ने भी आकर्षक गंगा दशहरा द्वार पत्र बनाए हैं। संस्कृतिप्रेमी इंद्रेश कुमार ऐसी सांस्कृतिक गतिविधियों को बच्चों के लिए भी जरूरी बताया। कहा कि बच्चों का यह प्रयास सराहनीय है।
भगवत प्रसाद पांडेय वैक्सीन लगाने का दे रहे हैं संदेश
लोहाघाट (चंपावत)। यहां ग्राम पाटनपाटनी निवासी राजस्व विभाग में कार्यरत भगवत प्रसाद पांडेय गंगा दशहरा द्वार पत्र के माध्यम से कोरोना की रोकथाम और टीके लगाने का संदेश दे रहे हैं। पांडेय ने इस बार गंगा दशहरा द्वार पत्र में अपने संदेश में नदियों को साफ रखने के साथ ही कोरोनाकाल में अपने हाथ की स्वच्छता, सुरक्षित दूरी का पालन करने के साथ ही कोरोना का टीका लगाने पर बल दिया है। उन्होंने बताया कि इस बार 20 जून को गंगा नदी के अवतरण की तिथि है। भगवत पांडेय के द्वार पत्र लोगों की ओर से पसंद किए जाते हैं। (संवाद)