चंपावत जिले में महाकाली नदी में प्रस्तावित है पंचेश्वर बांध।
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चंपावत। चमोली जिले में रविवार सुबह आए जल प्रलय ने उत्तराखंड राज्य में प्रस्तावित बांधों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में चंपावत जिले के पंचेश्वर में प्रस्तावित बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर सवाल उठना लाजमी है। उत्तराखंड और नेपाल के बीच शारदा नदी (महाकाली) पर पंचेश्वर बांध परियोजना अभी प्रस्तावित स्थिति में है।
परियोजना के क्रियान्वयन से राज्य के तीन जिलों पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चंपावत के तकरीबन 130 गांवों के प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर रॉकफिल यानी की पहाड़ों की कटिंग के अनुरूप तकनीक से बनने वाले पंचेश्वर बांध को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि कभी आपात स्थिति में पंचेश्वर बांध के टूटने की आशंका होने पर रूपालीगाढ़ में प्रस्तावित रेग्यूलेटिंग बांध पंचेश्वर बांध के पानी को नियंत्रित कर सकेगा। इससे किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा। पंचेश्वर परियोजना पर दो चरणों में काम पूरा किया जाना है। पहले चरण में 315 मीटर ऊंचा बांध पंचेश्वर में महाकाली और सरयू नदी के संगम से दो किमी नीचे बनाया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में रुपालीगाढ़ में 145 मीटर ऊंचाई वाला रेग्यूलेटिंग बांध बनाया जाएगा। रूपालीगाढ़ में प्रस्तावित बांध से 240 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी किया जाएगा।
जोन चार में शामिल है प्रस्तावित पंचेश्वर बांध
चंपावत। भूगर्भवेत्ताओं के अनुसार प्रस्तावित पंचेश्वर बांध भूगर्भीय हलचलों की दृष्टि से जोन चार में शामिल है। पंचेश्वर जैसे बड़े बांधों का विरोध कर रहे सक्रिय कार्यकर्ता मोहन भाई के अनुसार पंचेश्वर बांध में पानी को रोके जाने से यहां लगभग 80 से 90 करोड़ घन लीटर पानी का अतिरिक्त दबाव बनेगा, जिसके कारण इस संवेदनशील क्षेत्र में अवस्थित चट्टानों के खिसकने एवं धंसने की घटनाओं में वृद्धि होने की संभावना है। (संवाद)