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गेहूं खरीद में फिसड्डी रहा चंपावत, एक दाना नहीं खरीद सका

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Purchase of Wheat in Tanakpur
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टनकपुर (चंपावत)। चंपावत जिले में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए यह साल मायूसी भरा रहा। खरीद की समयावधि 31 मई को बीतने के बावजूद किसी भी क्रय केंद्र में गेहूं नहीं खरीदा जा सका। तीन साल बाद जिले में गेहूं की खरीद सिफर रही है।
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गेहूं रबी की सबसे प्रमुख फसल है। चंपावत जिले में 7134 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा का है। जिले में इस साल करीब साढ़े सात हजार मीट्रिक टन पैदावार हुई। इसे खरीदने के लिए जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में कुल तीन गेहूं खरीद केंद्र खोले गए थे लेकिन सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक मनोहर सिंह मर्तोलिया ने बताया कि इस बार किसी भी क्रय केंद्र में गेहूं की खरीद नहीं हो सकी। इस बार गेहूं का सरकारी दाम पिछले साल की अपेक्षा 40 रुपये ज्यादा मिल रहे थे। इसके लिए 2015 रुपये रेट के साथ 20 रुपये क्विंटल बोनस भी अतिरिक्त देय था।
वरिष्ठ विपणन अधिकारी केसी आर्या और टनकपुर सहकारी क्रय विक्रय समिति के सचिव दीनानाथ वर्मा का कहना है कि ये सभी केंद्र 31 मई तक खोले गए लेकिन एक भी किसान गेहूं बेचने वहां नहीं आया। दो महीने तक इन क्रय केंद्रों को खोलने और किसानों की सुविधा के लिए व्यवस्था बनाने में हजारों रुपये खर्च हुए जबकि पिछले साल चंपावत जिले में 236 किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों में 5477 क्विंटल गेहूं बेचा था। इसमें से टनकपुर में 415.50 और बनबसा में 5061.50 क्विंटल गेहूं मिला था। किसानों का कहना था कि खुले बाजार में अधिक दाम मिलने की वजह से यहां गेहूं नहीं बेचा जबकि पिछले साल कोरोना की वजह से चंपावत जिले में खूब खरीद हुई।
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पिछले तीन वर्ष में चंपावत जिले में हुई गेहूं की सरकारी खरीद
2019 में 65 किसानों से 2800 क्विंटल।
2020 में 79 किसानों से 1659 क्विंटल।
2021 में 238 किसानों से 5477 क्विंटल।
इन वजहों से नहीं हो सकी गेहूं की सरकारी खरीद
1. गेहूं की खुले बाजार में 275 रुपये प्रति क्विंटल कीमत ज्यादा होना।
2. छोटी जोत होने से सरकारी क्रय केंद्र में बिक्री में व्यावहारिक दिक्कतों का होना।
3. भुगतान में होने वाली देरी।
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