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पुरस्कार वितरण के साथ सतर्कता जागरूकता सप्ताह संपन्न

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बनबसा एनएचपीसी में महापंबंधक राजीव सचदेवा ने शाल ओढ़ा किया कारगिल युद्घ सेनानी को सम्मानित।संव? - फोटो : TANAKPUR
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बनबसा (चंपावत)। टनकपुर पावर स्टेशन में पुरस्कार वितरण के साथ सतर्कता जागरूकता सप्ताह का समापन हो गया। मुख्य अतिथि कारगिल युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सेवानिवृत्त सूबेदार डीडी कापड़ी को महाप्रबंधक राजीव सचदेवा ने सम्मानित किया। सूबेदार कापड़ी ने सेना और कारगिल युद्ध के अपने संस्मरण सुना सभी को रोमांचित कर दिया। महाप्रबंधक राजीव सचदेवा ने अधिकारियों और कर्मचारियों को जीवन में सदैव सतर्क और जागरूक रहनेे के लिए प्रेरित किया।
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एनएचपीसी में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। स्कूली बच्चों की कविता पाठ जूनियर में हया फातिमा, वैभवी जोशी, अंकुर सिंह, सीनियर में सुमेधा गड़कोटी, मुस्कान शर्मा, प्रार्थना नेगी, वादविवाद में अदिति, सत्यम चंद, सुमेधा उपाध्याय पहले तीन स्थानों पर रहे।
पावरस्टेशन कर्मियों की कवितापाठ में एएन उप्रेती, शेखर जोशी, अनिल कुमार सिंह, निबंध प्रतियोगिता में छवि पोखरिया, भगवती मिराल, शिव कुमार श्रीवास्तव, प्रश्नोत्तरी में विजय कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह, संजीव कुमार सिंह, वाद विवाद में वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, बीएस शेखावत, विनोद कुमार उप्रेती, महिलाओं की कवितापाठ के लिए वीणा कुमारी, आराधना नाथ, प्रीता जैन पहले तीन स्थानों पर रहे।
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मानव संसाधन विभाग के उपप्रबंधक सुरेश कुमार ने संचालन किया। परियोजना सतर्कता अधिकारी कुमार निरंजन नाथ ने आभार जताया। इस मौके पर महाप्रबंधक मदन लाल, गोपाल सिंह बिष्ट, प्रतियोगिताओं के निर्णायक आनंद कुमार टैंभरे, संजय कुुमार सिंह, डी श्रीनिवास राव, डॉ. मीरा जैन, केवि क्रमांक दो प्राचार्या रंजना बरफाल आदि मौजूद रहे।
कारगिल युद्ध में मिली थी पुलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी : कापड़ी
बनबसा (चंपावत)। एनएचपीसी में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के समापन मौके पर सम्मानित सेवानिवृत्त सूबेदार देवी दत्त कापड़ी ने बताया कि कारगिल युद्ध में उन्हें कारगिल लेह लद्दाख को जोड़ने वाले पुलों की सुरक्षा का काम मिला था। कई बार वायुयान से सीमा सुरक्षा की जाती थी।
बताते हैं कि अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर सेना जवान कई माह तक नहा तक नहीं पाते हैं। बर्फ पिघलाकर पानी पीते हैं। कई माह तक घरों से संपर्क न होने से परिवार को चिंता होती है। उनकी पत्नी रानी कापड़ी तो बच्चों को घर पर छोड़ उन्हें देखने को कारगिल तक पहुंच गईं थीं, उन्हें सही सलामत देख ही घर लौटीं।
मूल रूप से पिथौरागढ़ के खुना गांव निवासी कापड़ी वर्ष 1974 से बनबसा में रह रहे हैं। पिथौरागढ़ से हाईस्कूल करने के बाद वे वर्ष 26 जून 1974 में सेना में भर्ती हुए। नासिक में प्रशिक्षण के बाद उन्हें वर्ष 1976 में लुधियाना में 29 एडी (एयर डिफेंस) में भेजा गया। वर्ष 1976 में लांसनायक, वर्ष 1977 में हवलदार, वर्ष 1980 में नायब सूबेदार, वर्ष 1995 में सूबेदार बनाया गया। वर्ष 2002 में वे सेवानिवृत्त हुए। अब वे गौरव सेनानी कल्याण समिति के सक्रिय सदस्य हैं।
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