लुभावना अंदाज: शारदा नदी क्षेत्र के भू कटाव वाले क्षेत्र के मुआयने से लौटने के बाद मुख्यमंत्री पु
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चंपावत। प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने 12 फरवरी 2014 को अहमदाबाद पर चाय पे चर्चा शुरू कर इसे सियासी रणनीति का बड़ा हथियार बना दिया था। चाय और सियासत का ये समागम अब भी जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को टनकपुर दौरे पर एकाएक चाय की दो चर्चित दुकान में पहुंच चाय की चुस्की ली। विधानसभा सीट की उहापोह के बीच इसके कई सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। संकेत मिल रहे हैं कि कार्यकर्ताओं की अपील और विधायक कैलाश गहतोड़ी की सीएम के लिए सीट छोड़ने की पेशकश के बाद भाजपा आलाकमान मुख्यमंत्री के लिए चंपावत सीट पर संजीदगी से गौर कर रहा है।
सीएम ने टनकपुर के कार्यक्रम में शारदा नदी और पूर्णागिरि मैया से पुराना जुड़ाव बताया। चंपावत, खटीमा, बनबसा के कामों को आगे बढ़ाएंगे। इस पर जोशीले कार्यकर्ताओं ने चंपावत से भर दी हामी, पुष्कर धामी-पुष्कर धामी के नारे लगा फिर से उन्हें यहां से चुनाव लड़ने का न्यौता दिया। सीएम ने इस पर बस इतना कहा कि चुनाव लड़ना या न लड़ना एक अलग विषय है, लेकिन जो स्नेह इस क्षेत्र के लोगों ने दिया है, उसे वे जीवन भर याद रखेंगे।
इससे पूर्व सीएम का एकाएक चाय की दो दुकानों (महावीर और शिरोमणि टी स्टॉल) पर पहुंचने ने सबको हैरत में डाला। धामी ने यहां चाय पी और उनका हालचाल जाना। दरअसल चाय की ये चर्चित दुकानें क्षेत्र की सियासी नब्ज को जानने के साथ राजनीतिक बहस का अड्डा भी रही हैं। विधायक के संग चाय की दुकान में चाय की चुस्की के मायने चाहे जो भी हो, लेकिन इसने भीषण गर्मी के बीच न केवल सियासी पारा जरूर चढ़ा दिया है, बल्कि चंपावत सीट से चुनाव लड़ने की संभावना पर भी चर्चा को बल दिया है। भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक पाठक का कहना है कि विधायक गहतोड़ी पहले ही सीएम के लिए सीट छोड़ने की पेशकश कर चुके हैं और संगठन भी चाहता है कि सीएम यहां से चुनाव लड़ रिकार्ड जीत हासिल करें। इसे लेकर बाकायदा पार्टी स्तर से प्रदेश संगठन को प्रस्ताव भी भेजा जाएगा।