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सेनानियों के गांव से फैल रही ‘खेंचुआ’ की खुशबू

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चंपावत जिले के खेतीखान की खास मिठाई खेंचुए के साथ मिठाई निर्माता पवन ओली। - फोटो : CHAMPAWAT
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खेतीखान की ख्याति नामी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कुमाऊं के शेर कहे जाने वाले पंडित हर्षदेव ओली के कस्बे से होती है लेकिन उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यहां के मिठाई के जायके ने खास जगह बनाई है। खेंचुआ (विशेष तरीके से दूध से निर्मित मिठाई) की खुशबू खेतीखान और चंपावत जिले की सरहद के बाहर भी फैल रही है।
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इसे बनाने वाले उद्यमी पवन ओली न केवल क्षेत्र के लोगों के लिए मिसाल बने हुए हैं बल्कि छोटे कस्बे में 11 अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। उन्हें घर में ही सवा लाख रुपये सालाना से अधिक की कमाई हो रही है।
चंपावत से 29 किमी दूर खेतीखान कभी खेती के लिए प्रसिद्ध था। कुछ दशकों से यहां खेती में गिरावट आई तो लोगों ने दूसरे क्षेत्र में हाथ आजमाए। खेतीखान के इंद्रा पार्क से कुछ दूरी पर रिंकू स्वीट्स नाम की दुकान है जिसमें बनने वाला खेंचुआ खास है। खेंचुआ के अलावा यहां की लॉज और रबड़ी का खूब नाम है।
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मिठाई बनाने वाले पवन ओली बताते हैं कि छोटे कस्बे से हुई शुरुआत के चलते उन्हें पहले पहचान बनाने के लिए तीन साल तक संघर्ष करना पड़ा। गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न करने के चलते उन्हें धीरे-धीरे कामयाबी मिली।
अब उनकी दुकान की इस खास मिठाई की खेतीखान और चंपावत जिले के अलावा कुमाऊं के कई क्षेत्रों में भी खूब मांग है। आईटीआई से इलेक्ट्रॉनिक्स के डिप्लोमाधारी पवन ओली दो दशक पूर्व चुनी स्वरोजगार की राह से खुश हैं।
खेंचुआ बनाने का ये है तरीका
चंपावत। खेंचुए को बनाने के लिए सिर्फ दूध और चीनी का उपयोग होता है। 100 लीटर दूध में 8 किलोग्राम चीनी को मिलाया जाता है। सबसे पहले दूध को हल्की आंच में घोंटा जाता है।
दूध के रबड़ी का आकार लेने के बाद इसमें चीनी मिलाई जाती है और इस तरह तैयार होता है खेंचुआ। रिंकू स्वीट्स के स्वामी पवन ओली बताते हैं कि इसमें समय और मेहनत खूब लगती है। इस बात का खास ध्यान रखना पड़ता है कि दूध कढ़ाव के तले में न लगे ताकि इसका स्वाद बने रहे।
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