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पंचेश्वर बांध बन सकता है बागेश्वर रेल लाइन की राह का रोड़ा

Wed, 19 Jul 2017 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
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पंचेश्वर बांध निर्माण के लिए वाप्कोस कंपनी की ओर से की गई मार्किंग। - फोटो : अमर उजाला
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 जिले में पांच नदियों के संगम स्थल पंचेश्वर में भारत और पड़ोसी देश नेपाल के बीच प्रस्तावित बहुउद्देशीय बांध के निर्माण से बांध के डूब क्षेत्र से प्रस्तावित महत्वाकांक्षी टनकपुर-बागेश्वर और टनकपुर-जौलजीबी रेलवे लाइन के निर्माण की योजना खटाई में पड़ने की आशंका बन रही है। इसके अलावा चीन और नेपाल की सीमा पर सामरिक दृष्टि से प्रस्तावित टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग भी अधर में लटक जाएगा।
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बिजली और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण पंचेश्वर बांध का काफी बड़ा डूब क्षेत्र काली नदी से सटे इलाकों में है। इसे अब तक रेल लाइन के लिए भी उपयुक्त माना जा रहा था। टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग का ज्यादातर हिस्सा महाकाली नदी के पास से गुजरना है। ऐसे में यदि केंद्र सरकार को जरूरी लगेगा तो रेल लाइन और सड़क का सर्वे पंचेश्वर बांध परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ही शुरू हो सकेगा। रेलवे लाइन को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे टनकपुर- बागेश्वर रेल पथ निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष गंगा गिरि गोस्वामी का कहना है कि जब पहाड़ों में रेल लाइन नहीं बिछाई जाएगी तक तक पहाड़ विकास की मुख्यधारा में नहीं आ सकते हैं। उनका कहना है कि यदि पहाड़ का विकास करना है तो रेल लाइन बिछानी ही होगी। यदि पंचेश्वर बांध के निर्माण से रेलवे लाइन बिछाने में कुछ व्यवधान भी पेश आता है तो केंद्र सरकार को इसका विकल्प तलाशना चाहिए। हल्द्वानी-रीठासाहिब रेलपथ निर्माण संघर्ष समिति के भवान सिंह परवाल कहते हैं कि पर्वतीय क्षेत्र के विकास के लिए बांध के बजाय रेलवे लाइन बहुत जरूरी है।

अंग्रेजों ने वर्ष 1902 में कर लिया था लाइन का सर्वे
चंपावत। टनकपुर-बागेश्वर रेल पथ निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष गंगा गिरि गोस्वामी के अनुसार अंग्रेजों ने 1902 में इस रेल योजना पर काम करना शुरू कर दिया था। अंग्रेजों ने सर्वे कराकर टनकपुर से बागेश्वर तक रेल लिंक की 155 किमी की दूरी भी तय कर दी थी। यह योजना उन सैकड़ों गांव वालों के लिए लाइफ लाइन साबित होती जो आज भी बुनियादी सुविधा से महरूम हैं।
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टनकपुर से बागेश्वर तक आठ रेलवे हॉल्ट प्रस्तावित
चंपावत। ब्रिटिश हुकूमत के अलावा आजाद भारत में भी टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को लेकर तीन-चार बार सर्वेक्षण का कार्य हो चुका है। अब तक करीब डेढ़ सौ किमी की दूरी में आठ रेलवे हॉल्ट प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें टनकपुर, बूम, पूर्णागिरि, डुंगराबोरा, पंचेश्वर, रामेश्वर, अल्मोड़ा जिले का सेराघाट और बागेश्वर जिले का बिलौना कस्बा शामिल है।
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