टनकपुर (चंपावत)। टनकपुर और बनबसा में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 11,009 क्विंटल कम खरीद दर्ज हुई है। कृषि उत्पादन मंडी समिति के अनुसार किसानों से व्यापारियों ने सर्वाधिक 67,000 क्विंटल खरीद क्रय किया। सरकारी कांटों पर मात्र 14,049 क्विंटल धान तुला। यूपी से भी 4,728 क्विंटल धान आया। 31 जनवरी को तौल बंद हो चुकी है।
बता दें कि मैदानी क्षेत्र की धान और गेहूं की फसल प्रमुख है। पिछले कुछ समय से काॅलोनियां कटने से कृषि क्षेत्र सिमटता जा रहा है जिसका असर फसल उत्पादन पर भी पड़ रहा है। मंडी समिति के प्रभारी सचिव दिलीप चंद ने बताया कि इस बार एक अक्तूबर से टनकपुर और बनबसा में सरकारी क्रय केंद्र खुल गए थे। इनमें काॅमन धान का मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल घोषित हुआ। सरकारी क्रय केंद्रों के बजाय किसानों का रुख आड़तियों की तरफ अधिक रहा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 की तुलना में इस बाार कम खरीद दर्ज हुई है। तब व्यापारियों ने 77,000 क्विंटल खरीदा था। क्रय केंद्रों में 9,030 क्विंटल धान आया था जबकि यूपी से 10,366 क्विंटल धान आया था। बहरहाल, कृषि के प्रति कम रुझान और नई काॅलोनियां भी कम उत्पादन का कारण माना जा रहा है।
राह आसान हुई तो पहाड़ के उत्पाद सीधे महानगर पहुंच रहे
पहाड पर सड़कों का जाल बिछते ही पहाड़ के सब्जी और फल उत्पादक किसान सीधे मैदान की बड़ी मंडियों की ओर रुख करने लगे हैं। उनको अच्छी कीमत मिल रही है। पिछले दो दशक तक टनकपुर की मंडी समिति में पहाड़ के नाशपाती, आलू, माल्टा, अदरक, नींबू समेत अन्य फसल अच्छी मात्रा में आती थीं। इस सीजन में मात्र 51 क्विंटल अदरक ही मंडी समिति के आंकड़ों में दर्ज हुई है। वर्ष 2024-25 में 598 क्विंटल नाशपाती दर्ज हुई थी। अब मंडी समिति की आय भी कम होती जा रही है।