मां पूर्णागिरि धाम में स्थित मां की देवी।
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चंपावत। प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक मां पूर्णागिरि धाम में इस बार श्रद्धालु देवी मां के दर्शन नहीं कर सके। वहीं नेपाल सीमा से लगे इस धाम में ऑनलाइन पूजा का भी विकल्प नहीं है। इसकी वजह यहां की लचर संचार सेवा है। थ्री-जी की सुविधा नहीं होने से ऑनलाइन धार्मिक गतिविधियां संभव नहीं है। वहीं जिला प्रशासन की ओर से ऑनलाइन पूजन से संबंधित कोई प्रस्ताव भी नहीं है।
चंपावत जिले की पूर्णागिरि (टनकपुर) तहसील में स्थित पूर्णागिरि धाम में इस बार सरकारी मेले में भी अड़चन आई। होली के बाद 11 मार्च से शुरू जिला पंचायत संचालित सरकारी मेला कोरोना के चलते 97 दिन के बजाय महज आठ दिन ही सका। 15 जून तक चलने वाले इस मेले को कोरोना के चलते निरस्त कर दिया गया था। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित भुवन पांडेय का कहना है कि लोगों की आस्था को बचाने के लिए समिति अपने स्तर से प्रयास करेगी। समिति टनकपुर में ऑनलाइन बुकिंग कर मंदिर में पूजा का वीडियो बनाकर अपलोड करने पर विचार करेगी। इसमें प्रशासन की भी मदद ली जाएगी।
इधर प्रशासन का कहना है कि पूर्णागिरि धाम में ऑनलाइन पूजा का फिलहाल न तो विकल्प है, और नहीं जिला प्रशासन की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव है। दरअसल पूर्णागिरि धाम में संचार सेवा इस कदर लचर है कि यहां न तो नेटवर्क के हाल ठीक हैं और नहीं मंदिर क्षेत्र में ज्यादातर जगह मोबाइल से बात हो पाती है।
जिलाधिकारी सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से पूर्णागिरि धाम या जिले के किसी भी तीर्थस्थल में ऑनलाइन पूजा का कोई प्रस्ताव नहीं है। वैसे भी पूर्णागिरि धाम में मोबाइल नेटवर्किंग और अन्य संचार सेवा भी कमजोर है।
मुमकिन नहीं ऑनलाइन कॉलिंग : जीएम
चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र में सेलागाड़ में बीएसएनएल ने दो साल पूर्व टावर लगाया, लेकिन पहाड़ी की वजह से इसमें कई जगह अड़चन आती है। बीएसएनएल के अल्मोड़ा क्षेत्र के महाप्रबंधक एके गुप्ता बताते हैं कि पूर्णागिरि क्षेत्र की संचार सेवा बीटीएस (बेस ट्रांसीवर स्टेशन) से चल रही है। इसमें ऑनलाइन कॉलिंग मुमकिन नहीं है। बिना ऑप्टीकल फाइबर केबिल के थ्री-जी नहीं चल सकता।