टनकपुर/चंपावत। ब्लाक के इकलौते आदर्श जीजीआईसी टनकपुर के लिए भी सरकार शिक्षिकाओं की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। जिले में सबसे अधिक 1020 की छात्र संख्या वाले इस जीजीआईसी में प्रवक्ता और एलटी शिक्षिकाओं के सात-सात पद खाली हैं। अभिभावक कोष से पांच शिक्षिकाओं को रखा गया है। जिनके मानदेय के लिए लिए छात्राएं 20 रुपये प्रति माह देती हैं। इस कॉलेज में तीन साल में छात्रसंख्या 1148 से घटकर 1020 हो गई है।
आदर्श स्कूल होने के बावजूद शिक्षा विभाग इस जीजीआईसी प्रवक्ताओं के रिक्त पदों को नहीं भर पा रहा है। प्रवक्ताओं के 10 पदों में से महज तीन विषय (हिंदी, अंग्रेजी व रसायन विज्ञान) के प्रवक्ता तैनात हैं। बाकी के सात विषयों प्रवक्ताओं के पद खाली पड़े हुए हैं। प्रवक्ता न होने से छात्राओं की पढ़ाई और जेब पर मार पड़ रही है। यही हाल एलटी शिक्षिकाओं के पदों के बना है। एलटी शिक्षकों के स्वीकृत 16 पदों में से सात खाली पड़े हुए हैं।
अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) के कोष से पांच शिक्षिकाओं को रखा गया है। जिसके लिए छात्राओं से हर माह 20 रुपये लिए जाते हैं। इधर सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार शासन से पत्राचार किया जा रहा है।
इन विषयों में नहीं हैं शिक्षिकाएं:
प्रवक्ता: संस्कृत, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, गृह विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित व जीव विज्ञान।
एलटी:हिंदी व सामाजिक विज्ञान में सृजित दो-दो और व्यायाम में एक पद।
कोट
अभिभावक संघ ने अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, जीव विज्ञान, सामाजिक विज्ञान व अंग्रेजी की शिक्षिकाओं की व्यवस्था अपने स्तर से की है। साथ ही शिक्षिकाओं के पदों को भरने के लिए लगातार आवाज उठाई जा रही है।
सरोज सिंह, अध्यक्ष, पीटीए।
कोट
आदर्श जीजीआईसी में शिक्षिकाओं की तैनाती नहीं करने से छात्राओं को कई विषयों के लिए ट्यूशन लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिले के सभी जीजीआईसी में रिक्त पदों पर तैनाती के लिए आवाज उठाई जाएगी।
हिमेश कलखुड़िया।
कोट
प्रवक्ताओं और एलटी शिक्षिकाओं की कमी का पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। अभिभावक कोष से पांच शिक्षिकाओं की वैकल्पिक व्यवस्था कर हालात को सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।
हौंसला सिंह,
प्रभारी प्रधानाचार्या।