हाइकोट ने भले ही गंगा और यमुना को जीवित नदी का दर्जा दिया हो, पर इन नदियों को अपने पुराने स्वरूप में लौटा पाना आसान नहीं दिख रहा है।
जिला मुख्यालय में नदी के आसपास फैली गंदगी के निस्तारण की कोई योजना फिलहाल नहीं है। सीवरेज का प्रस्ताव भी फिलहाल लटका हुआ है। अलबत्ता उद्योग नहीं होने से गंदगी का स्तर जरूर कम है। वहीं गुरुद्वारे की वजह से प्रसिद्ध धर्मनगरी रीठा साहिब की नदियों के हाल बेहद खराब है। यहां लधिया और रतिया नदी का संगम है लेकिन रीठा बाजार की गंदगी इसी नदी के आसपास जाती है। गुरुद्वारा प्रबंधक बाबा श्याम सिंह का कहना है कि मेले के वक्त यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करते हैं, लेकिन नदी की सफाई का कोई बंदोबस्त नहीं है।
इसी तरह लोहाघाट नगर के लिए पेयजल की आपूर्ति करने वाली लोहावती नदी में गंदगी के अंबार है। सीवर लाइन नहीं होने से गंदगी लोहावती में प्रवाहित हो रही है। नदी को स्वच्छ रखने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए जाने से नगर क्षेत्र के लोग दूषित पानी पीकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। नगर पंचायत क्षेत्र के तहत नगर पंचायत द्वारा गंदगी के निस्तारण के लिए चार मुख्य नालों का निर्माण किया गया है। इसमें से बाड़ीगाड, पंचेश्वर टैक्सी स्टैंड, स्टेशन बाजार और पिथौरागढ़ रोड से कोलीढेक पुल तक नालों का निर्माण किया गया है।
इन नालों के जरिए क्षेत्र की गंदगी को नदी में प्रवाहित किया जाता है। साथ ही नदी का जल भी दिनों दिन प्रदूषित होता जा रहा है। लेकिन इसके जल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। अलबत्ता कुछ संगठन कभी कभी अभियान चलाकर सफाई करते हैं। लोहावती के तट पर ही नगर क्षेत्र का प्रसिद्ध श्मशान घाट है। लोगों द्वारा शवों का अंतिम संस्कार करने के बाद उसकी राख को नदी में प्रवाहित किया जाता है।
तीन बार भेजा गया सीवर लाइन का प्रस्ताव
लोहाघाट नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा का कहना है कि शहर के लिए सीवर लाइन बनाने का केंद्र व राज्य सरकार को तीन बार इस्टीमेट भेजा गया है। लेकिन इस दिशा में अब तक कोई प्रगति नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि नगर पंचायत का इरादा नालों से बहने वाली गंदगी और सीवर को एकत्र करने के लिए बड़े टैंक का निर्माण कर पाइप लाइन के जरिए गंदगी को नगर क्षेत्र से करीब पांच किमी दूर छोड़ने का है।