पॉलिथीन को लेकर अदालत का रवैया बेहद सख्त है बावजूद इसके पॉलिथीन का उपयोग नहीं थम रहा है। शहर ही नहीं गांवों में भी पॉलिथीन धड़ल्ले से चल रही है। वहीं, नगर पालिका, जिला पंचायत और प्रशासन भी इन पर रोक लगाने में विफल रहे हैं।
पॉलिथीन का प्रयोग पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। इसी के मद्देनजर अदालत ने भी इसके उपयोग पर रोक लगाई है। इसके बाद भी पॉलिथीन दुकानों से लेकर लोगों के हाथों तक में खूब नजर आ रही है। सब कुछ देखते हुए भी प्रशासनिक अमला आंखें मूंदे हुए हैं। बता दें कि जिला मुख्यालय में पॉलिथीन सहित प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग के लिए कांपैक्टर मशीन भी है।
उधर, चंपावत की एसडीएम सीमा विश्वकर्मा और नगर पालिका के ईओ अभिनव कुमार का कहना है कि पॉलिथीन पर लगाम कसने को एक हफ्ते के भीतर वृहद अभियान चलाया जाएगा। इसको बेचने अथवा उपयोग करने वालों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
पॉलिथीनों से भरे हैं कूड़े के ढेर
पॉलिथीन के उपयोग का आलम यह है कि नालियों से लेकर कूड़े के ढेर तक इससे पटे पड़े हैं। नालियां चोक हैं तो कूड़े के ढेरों में पॉलिथीन बिखरे होने से गाय सहित अन्य जानवर उसे खा रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. एचसी जोशी का कहना है कि पॉलिथीन को खाने से दूध देने वाले मवेशियों की सेहत और दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है।
गांवों में भी लगेगा 5000 का जुर्माना
ग्रामीण क्षेत्रों में भी पॉलिथीन के उपयोग पर रोक है। इसे लेकर जिला पंचायत ने बाकायदा चेतावनी जारी की है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) राजेश कुमार ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में पॉलिथीन, प्लास्टिक और थर्माकोल से बनी सामग्री प्रतिबंधित रहेंगी। थैलियां या इनसे बनी किसी भी पत्तल, ग्लास, कप या पैकिंग सामग्री का उपयोग, विक्रय और भंडारण गैर कानूनी होगा। गांवों में लगने वाले मेलों पर भी प्रतिबंध लागू रहेगा। एएमए कुमार ने कहा कि आदेश के उल्लंघन पर पांच हजार रुपए का अर्थदंड वसूला जाएगा।