लोहाघाट (चंपावत)। जहां एक ओर दिव्यांगों को हर प्रकार की सुविधाएं दिलाने के कई दावे किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। चंपावत जिले में ईएनटी और मानसिक रोगियों को अपने दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने और उनका नवीनीकरण करवाने के लिए करीब 200 किमी दूर हल्द्वानी जाना पड़ रहा है।
जिला स्तर पर ईएनटी और मनोचिकित्सक तैनात न होने से इन रोगों से ग्रसित दिव्यांगों के प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। जिले में लगने वाले दिव्यांग शिविर में प्रमाणपत्र बनने की आस में कई दिव्यांग अपना समय और किराया बर्बाद कर पहुंचते हैं, लेकिन इन रोगों के चिकित्सकों के न होने से प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। शिविरों में आने वाले अन्य चिकित्सक इन रोगों से ग्रसित रोगियों को दिव्यांगता परीक्षण और दिव्यांगता प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के लिए एसटीएच हल्द्वानी रेफर कर देते हैं। इससे दिव्यांग निराश होकर लौट आते हैं। सबसे अधिक दिक्कतें छोटे बच्चों और मानसिक रोगियों के परिजनों को होती है, जिन्हें परीक्षण के लिए अपने बच्चों को हल्द्वानी ले जाना मुश्किल होता है।
तीन माह में एक दिन सेवा देने का अनुरोध
लोहाघाट (चंपावत)। जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) के समन्वयक अनिल जोशी ने बताया कि जिले में ईएनटी और मनोचिकित्सक न होने से इस रोगों से पीड़ित दिव्यांगों को दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने में काफी दिक्कतें हो रहीं हैं। अनिल ने बताया कि सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को पत्र भेजकर तीन माह में एक दिन ईएनटी और मनोचिकित्सक की सेवाएं चंपावत जिले में उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया गया है। इसलिए ईएनटी और मानसिक दिव्यांगों की सूची बनाई जा रही है, ताकि उनके प्रमाणपत्र बनवाने में मदद की जा सके।
चंपावत जिले में ईएनटी और मनोचिकित्सक तैनात नहीं हैं। इस कारण जिला स्तर पर ईएनटी और मानसिक रोगियों के दिव्यांग प्रमाणपत्र नहीं बन पाते हैं। सामान्य स्वास्थ्य शिविरों और जिले में लगने वाले विशेष दिव्यांग शिविरों में ऐसे रोगियों को दिव्यांगता परीक्षण के लिए एसटीएच रेफर किया जाता है।
- केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।