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नशामुक्त भारत अभियान चंपावत में विफल

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No More Anty Drug Programmes in Champawat
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चंद्रशेखर जोशी
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चंपावत। गरीबी के बावजूद जिले में नशाखोरी और इसमें हो रहे खर्च का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जिले में मदहोशी का आलम यह है कि पांच साल में शराब के कारोबार में 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई। नशाखोरी रोकने और जागरूकता बढ़ाने के लिए जिले में संचालित नशामुक्त भारत अभियान असर नहीं दिखा सका है। मौजूदा वित्त वर्ष के 10 माह से अधिक बीत गए हैं, लेकिन नशे के खिलाफ जागरूकता के नाम पर एक रैली के अलावा कुछ नहीं हुआ। इसी कारण टनकपुर के परिजनों को एक नशेड़ी बेटे को पिंजरे में बंद करना पड़ा।
नशामुक्त भारत अभियान के तहत समाज कल्याण विभाग को जागरूकता कार्यक्रम चलाना था। इसके लिए विभाग को वर्ष 2021-22 में 10 लाख रुपये मिले लेकिन टनकपुर में हुई एक रैली के अलावा कोई कार्यक्रम ही नहीं हो सका। योजना के तहत जागरूकता, गोष्ठियों से छात्र-छात्राओं, युवाओं को नशाखोरी से बचने के लिए प्रेरित किया जाना है। अभियान में सहयोग करने के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती भी नहीं की जा सकी जबकि जिले में शराब का कारोबार पांच साल में 80 प्रतिशत तक बढ़ गया है। शराबियों की संख्या भी 34 हजार को पार कर गई है।
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विकास से 40.66 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च हो रहे शराब पर
चंपावत। जिले में पियक्कड़ सालभर में 176.40 करोड़ रुपये की शराब पी जाते हैं। यानी औसतन रोजाना 48.32 लाख रुपये शराब में खर्च हो रहे हैं। एक पियक्कड़ हर माह औसतन 3954 रुपये खर्च कर रहा है। वर्ष 2015-16 में शराब से कर के रूप में 25.44 करोड़ रुपये मिले, जो 2021-22 में बढ़कर 63 करोड़ हो गए। जिला आबकारी अधिकारी तपन पांडेय ने बताया कि जिले में सालभर में शराब की कुल 2933856 बोतलें बिकीं। इनमें देसी शराब की बोतलें 1214208, विदेशी 1719648 बोतलें शामिल हैं। शराब के लिए जिले के करीब 34 हजार पियक्कड़ करीब 176.40 करोड़ रुपये उड़ा रहे हैं। ये रकम चंपावत जिले की 2021-22 की जिला योजना, राज्य योजना, वाह्य सहायतित योजना की कुल राशि 135.74 करोड़ से 40.66 करोड़ रुपये अधिक है। जिले में विकास पर औसतन रोजाना 37.18 करोड़, तो शराब पर 48.32 करोड़ खर्च हो रहे हैं।
हर माह पकड़ में आ रही 4.39 किलो चरस और 62.01 ग्राम स्मैक
चंपावत। शराब से इतर चंपावत जिले में चरस और स्मैक की लत भी बढ़ी है। इस कारण नशेड़ियों की संख्या भी बढ़ी है। स्मैक की गिरफ्त में आने वालों में बहुतायत में युवा हैं। नशे की इस लत से उनके समय और धन की बर्बादी हो रही है। शारीरिक, मानसिक ऊर्जा भी खत्म हो रही है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 2021 मेें दबोचे गए 59 मामलों में 744.163 ग्राम स्मैक बरामद हुई जबकि 26 मामलों में 52 किलो 740 ग्राम चरस पकड़ी गई। यानी हर महीने 4.395 किलो चरस और 62.01 ग्राम स्मैक पकड़ी गई।
चंपावत जिले में 2021 में चरस और स्मैक के मामले
चरस 26 मामले 52.740 किलोग्राम।
स्मैक 59 मामले 744.163 ग्राम।
2021-22 में चंपावत जिले में विभिन्न मदों में खर्च होने वाली रकम (करोड़ रुपये में)
जिला योजना 40.78 करोड़
राज्य योजना 92.57 करोड़
वाह्य सहायतित 2.39 करोड़
कुल योग 135.74 करोड़ रुपये
2021-22 में चंपावत जिले में शराब पर संभावित खर्च रकम 173.00 करोड़ रुपये
नशामुक्त भारत अभियान के तहत चालू वित्त वर्ष में एक कार्यक्रम टनकपुर में कराया गया। आठ जनवरी से लगी चुनावी अचार संहिता की वजह से फिलहाल यह जागरूकता अभियान रोका गया है। आचार संहिता हटने पर फिर से स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर मुख्य रूप से किशोरों और नौजवानों को जागरूक किया जाएगा। - आरएस सामंत, जिला समाज कल्याण अधिकारी, चंपावत।
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नशाखोरी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। इसकी अधिक खपत का संबंध अपराध में बढ़ोतरी से भी है। उन्होंने पहले दिन से ही स्मैक और चरस तस्करी रोकने के लिए टास्क फोर्स और खुफिया तंत्र को सजग किया है। नशे की गिरफ्त में आने वाले किशोर और युवाओं के परिजनों की मौजूदगी में काउंसलिंग की भी योजना है। इस काम में सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी जोड़ा जा रहा है। - देवेंद्र पींचा, एसपी, चंपावत।
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