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टनकपुर में न सस्ता इलाज और न सस्ती दवाएं

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टनकपुर (चंपावत)। सस्ता और सुलभ इलाज के दावे के बावजूद जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर में न तो सस्ता इलाज मिल रहा है और न ही सस्ती दवाएं। अस्पताल में तो न एक्सरे की व्यवस्था है और न ही अल्ट्रासाउंड की। सर्जन और निश्चेतक की मौजूदगी के बावजूद अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। दवाएं भी नहीं मिल रहीं हैं।
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रियायती दर पर दवा उपलब्ध कराने के लिए खोले गए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी यहां सितंबर 2020 से बंद है। केंद्र के लिए चार लाख रुपये से कक्ष में ताला लगा है और इसका उपयोग दूसरे काम में हो रहा है। इस वजह से लोग ऊंचे दाम पर ब्रांडेड दवाएं खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नुकसान होने की वजह से संचालकों ने जन औषधि केंद्र चलाने में असमर्थता जताई है।
चंपावत और लोहाघाट केंद्रों में भी नहीं है पर्याप्त दवाएं
चंपावत। कोरोना काल के बाद से दवाओं की मांग एकाएक बढ़ी है। बुखार की दवा, विटामिन सी, डी, जिंक, मल्टीविटामिन से बुखार नापने वाले थर्मामीटर और पल्स ऑक्सीमीटर की जरूरत बढ़ गई है लेकिन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों में बुखार को छोड़ कई दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। थर्मामीटर से लेकर विटामिन तक की गोलियां भी नहीं हैं।
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जिले में प्रधानमंत्री जन औषधि के तीन (चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर) केंद्र स्वीकृत हैं। एक केंद्र पर ताला लगा है, तो दो अन्य केंद्रों में दवाओं की कमी है। कई महत्वपूर्ण दवाओं के न होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। 335 प्रकार की दवाओं के सापेक्ष बमुश्किल 130 दवाएं ही उपलब्ध हैं। लीवर, टायफाइड, ज्यादातर एंटीबायोटिक दवाएं नहीं मिल रहीं हैं। जन औषधि केंद्र के प्रतिनिधियों का कहना है कि जेनेरिक दवाएं मंगाई हैं, लेकिन अभी नहीं पहुंचीं हैं। संवाद
टनकपुर के पीएम जन औषधि केंद्र को चलाने से कुछ समय पहले संचालक ने मना कर दिया। अब इस केंद्र को फिर से चलाने के लिए चुनाव आचार संहिता हटने के बाद निविदा निकाली जाएगी।
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- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
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