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मामूली बीमारी के लिए भी 35-40 किमी की दौड़ लगाने की मजबूरी

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No Hospital in Madlak
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लोहाघाट (चंपावत)। भारत-नेपाल सीमा पर बसे मडलक और दिगालीचौड़ क्षेत्र के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा से वंचित हैं। देश की आजादी के 75 वर्ष बाद भी इस क्षेत्र में कोई एलोपैथिक अस्पताल नहीं खुल सका है, जिससे यहां के ग्रामीणों को मामूली रोगों का उपचार के लिए 15 किमी दूर पुल्ला या 30 किमी दूर लोहाघाट या फिर 45 किमी दूर चंपावत जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है। जनता की मांग पर तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अक्तूबर 2019 में मडलक क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टाइप ए के निर्माण की घोषणा अल्मोड़ा से की थी लेकिन दो वर्ष बाद भी सीएम की घोषणा पूरी नहीं हो सकी है।
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अस्पताल निर्माण की मांग कई बार उठती रही है, आश्वासन भी भरपूर मिले लेकिन नतीजा शून्य रहा। नेपाल सीमा से लगे लेटी, सुंगरखाल, जमरसों, बगोटी, सल्टा, मजपीपल, मडलक, सागर, काकड़ी, बुंगा, सुनकुरी, सेल्ला, केलानी, बड़म, कंटुकरा, रजुवा, चामा, गुरेली, रौल-धौन, गुड़मागल, दिगालीचौड़, रौंसाल आदि गांवों की हजारों की आबादी को मामूली बीमारी के लिए भी दवाइयां नहीं मिल पाती हैं। एलोपैथिक स्वास्थ्य सेवा न होने से ग्रामीण यहां से पलायन करने के लिए मजबूर हैं। यहां के लोगों ने सीमावर्ती क्षेत्र में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की है। ग्रामीण यहां होने वाले मेलों, बहुउद्देश्यीय शिविर में आने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सम्मुख अस्पताल की मांग करते हैं। इसकी अनदेखी से लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
गर्मियों में रहता है संक्रामक रोगों का खतरा
लोहाघाट (चंपावत)। विषम भौगोलिक स्थिति होने, सीमा का क्षेत्र और गर्म घाटी होने के कारण यहां के डुंगरालेटी, बगोटी, गुरेली, सुनकुरी आदि गांवों में गर्मियों में संक्रामक रोगों का खतरा रहता है, जिस कारण यहां एक एलोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना होना बेहद जरूरी है। लोगों का कहना है कि सरकार ने ऐसे क्षेत्रों में अस्पताल की स्थापना के लिए मानकों में छूट देनी चाहिए। शहरी और सुविधा संपन्न इलाकों की तरह के मानक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लागू नहीं होने चाहिए। हालाकि मडलक क्षेत्र में एक आयुर्वेदिक अस्पताल है, लेकिन कई प्राथमिक उपचार समेत कई रोगों का इलाज नहीं हो पाता है। संवाद
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नेपाल सीमा से लगे मडलक क्षेत्र में लोगों की दिक्कतों को देखते हुए एलोपैथिक अस्पताल खोलने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। - डॉ. जुनैद कमर, चिकित्साधीक्षक, उप जिला अस्पताल लोहाघाट।
इलाज के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को करीब 30 किमी दूर लोहाघाट अस्पताल ले जाना पड़ता है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। - मोनू बिष्ट, ग्राम प्रधान, बिंडा तिवारी।
हमारे क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल न होने का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। छोटी मोटी बीमारी में भी उपचार के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़ती है। स्वास्थ्य सेवाएं न मिलने से संपन्न लोग गांवों से पलायन करते जा रहे हैं। - पवन कुमार, ग्राम प्रधान, मानाढुंगा।
सीमावर्ती क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के बुरे हाल हैं। मामूली बीमारी में भी यहां के लोगों को लोहाघाट, चंपावत आदि अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग सीमा से लगे गांवों से पलायन करने के लिए मजबूर हैं। - योगेश सिंह, ग्रामीण।
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