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पुल न होने से बरसात में टापू बन जाता है थ्वालखेड़ा

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भुवन पाटनी
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टनकपुर (चंपावत)। थ्वालखेड़ा के लोग हर बरसात में सहमे रहते हैं। बच्चों के स्कूल से लौटने तक परिजन बेचैन रहते हैं। इसकी वजह बरसात में जून से सितंबर तक शारदा नदी और किरोड़ा रोखड़ की बाढ़ से आवाजाही थम जाती है। लोग हर पल खतरे के साथ यहां से आवाजाही करते हैं। नाले से क्षेत्र के कैलाश शर्मा, केशव दत्त, सुरेश चिलकोटी, गिरीश राम, हीरा महर, पूरन पुजारी, सुंदर महर आदि की जमीन कट चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि विधायक कैलाश गहतोड़ी ने पांच साल पहले पुल निर्माण को अपने घोषणापत्र में रखा था, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहली सितंबर 2021 को टनकपुर दौरे में एक माह के भीतर नायकगोठ-थ्वालखेड़ा पुल का काम शुरू करने का एलान किया था लेकिन पुल निर्माण को मंजूरी तक नहीं मिल सकी है।
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टनकपुर से महज तीन किमी दूर मां पूर्णागिरि धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित थ्वालखेड़ा ग्राम पंचायत की आबादी 826 है। इसके दो गांव थ्वालखेड़ा और खेतखेड़ा शारदा नदी और किरोड़ा रोखड़ से बरसात में टापू जैसे अलग-थलग पड़ जाते हैं। इसके बावजूद थ्वालखेड़ा में एएनएम केंद्र या स्कूल तक नहीं है। दवाई और पढ़ाई के लिए ग्रामीण टनकपुर जाने के लिए मजबूर हैं। उपजाऊ जमीन पर लहलहाती फसलों को हाथी नष्ट कर जाते हैं।
वन्यजीवों से फसल बचाने के लिए तीन साल पहले लगी सोलर फेंसिंग खराब हो चुकी है। रेंजर महेश सिंह बिष्ट का कहना है कि तकनीकी खामी सुधार ली गई है, लेकिन धुंध और कोहरे की वजह से ये फेंसिंग अभी काम नहीं कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्याओं की लंबी फेहरिस्त के बीच 14 फरवरी को मतदान के जरिये वे समस्या सुलझने की उम्मीद करेंगे।
नायकगोठ-थ्वालखेड़ा में 135 मीटर लंबा और 5.50 मीटर चौड़ाई का पुल बनाया जाएगा। इसका प्रस्ताव विभागीय मुख्यालय के जरिये शासन को भेजा गया है। पुल के लिए करीब 14 करोड़ रुपये की मांग की गई है। पुल को अभी मंजूरी नहीं मिली है। शासन से अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्यवाही की जा सकेगी। - एमसी पांडे, ईई, लोनिवि, चंपावत।
पढ़ाई के लिए हम तीन किमी दूर टनकपुर जाते हैं। बरसात में नाले के उफान आने पर स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है। रास्ता बंद होने के कारण कई बार रास्ते से ही लौटना पड़ता है। - भारती जोशी, छात्रा।
ग्रामीणों को बरसात में आर-पार जाने के लिए घंटों तक पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है। किरोड़ा नाले पर पक्का पुल बनाने की जरूरत है। तभी समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। - लक्ष्मी देवी।
हमारे गांव थ्वालखेड़ा के लिए पक्का पुल बनना जरूरी है। इसके बगैर यहां बरसात में हमेशा डर बना रहता है। कई बार तो गांव के लोग टनकपुर में रात काटने के लिए मजबूर हो जाते हैं। - गीता तिवारी।
पुल निर्माण की मांग 22 साल से की जा रही है। मिला आश्वासन पूरा नहीं हुआ। बरसात में बीमार व्यक्ति से लेकर स्कूल या दूसरे काम के लिए जाने वालों को मुसीबत झेलनी पड़ती है। - कृष्ण सिंह महर।
सोलर फेंसिंग खराब होने से हाथी का आतंक भी बढ़ गया है। फेंसिंग को आसानी से पार कर हाथी खेतों तक पहुंच जाते हैं। फसल की बर्बादी के साथ ही लोगों के लिए भी हाथी खतरा बन रहे हैं। - नित्यानंद जोशी।
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सबसे बड़ी परेशानी पुल की है। भूकटाव से लेकर आवाजाही में भी परेशानी होती है। कई बार मांग कर चुके हैं। सीएम की घोषणा के बाद भी पुल का काम शुरू नहीं हो सका है। एएनएम सेंटर भी चाहिए। - दीपा बोहरा, ग्राम प्रधान।
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