चंपावत में बनलेख क्षेत्र में फंसे वाहन। संवाद
चंपावत। टनकपुर- पिथौरागढ़ एनएच पर स्वाला में बने डेंजर जोन ने भारी वाहनों की राह रोक रखी। बनलेख में 50 से अधिक कैंटर और ट्रक फंसे हैं। चालकों के लिए सात दिन से समय व्यतीत करना मुश्किल हो रहा है। किसी तरह यह लोग दिन में तो समय बिता रही हैं, लेकिन रात इनके लिए भी भारी हो रही है। चालकों ने बताया कि खाने की उन्हें काफी दिक्कतें हो रही हैं। एनएच खुलता तो टनकपुर की तरफ पहुंचने से उन्हें राहत मिली। परिवार के लोग भी चिंता कर रहे हैं। किसी तरह फोन चार्ज कर रहे हैं। खाने की समस्या हो रही है। रात में वाहन में सो रहे हैं। नहाना भी मुश्किल हो रहा है। सबसे अधिक दिक्कत खाने की है। इसमें से अधिकांश कैंटर और ट्रक चालकों को यूपी जाना है। यह सभी सामान छोड़कर पिथौरागढ़ और चंपावत से आए हैं। दिन में सड़क किनारे मनोरंजन के लिए यह लोग ताश खेल रहे हैं। गुजरते दिन इनके लिए बड़े भारी पड़ रहे हैं।
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बच्चे के प्रवेश के लिए पैदल पहुंचे चंपावत
चंपावत। खटोली निवासी उमेद सिंह बिष्ट अपने पुत्र को जवाहर नवोदय में प्रवेश कराने के लिए पैदल ही चंपावत निकल पड़े। उन्होंने बताया कि आज प्रवेश की अंतिम तिथि है। ऐसे में उन्हें मजबूर होकर पैदल ही आना पड़ा। इस दौरान उन्हें 20 किमी से अधिक पैदल चलना पड़ा। इसके अलावा ग्रिफ में कार्यरत एक व्यक्ति टनकपुर से किसी तरह स्वाला पहुंचा। फिर यहां से पैदल ही चंपावत के लिए निकल पड़ा। उसने बताया कि अगर ड्यूटी ज्वाइन नहीं करनी पड़ती तो वह नहीं आते। वह सड़क पर बार-बार पीछे से आने वाले वाहनों को देखते रहे, उन्हें उम्मीद थी कि किसी वाहन में जगह मिल जाए तो समय से पहुंच जाएं, लेकिन आवाजाही पूरी तरह ठप होने से ऐसा नहीं हो सका।
डाक वाहन भी फंसा
चंपावत। पिथौरागढ़ से टनकपुर डेली डाक लेकर जाने वाला वाहन भी फंस रहा। डाक वाहन के प्रकाश सिंह ने बताया कि वह बुधवार को पिथौरागढ़ से डाक लेकर टनकपुर के लिए निकले थे, लेकिन उन्हें चपावत में ही रोक दिया गया। बृहस्पतिवार को धौन में उन्होंने डाक दी। उन्होंने बताया कि एनएच पर यातायात सुचारू होने के बाद वह टनकपुर के लिए डाक लेकर निकलेंगे। हालांकि स्वाला डेंजर जोन में बाद में यातायात हल्के वाहनों के लिए सुचारु कर दिया गया था।