रवींद्र सिंह धामी
टनकपुर (चंपावत)। प्रमुख शारदा खनन क्षेत्र में वन विकास निगम की ओर से खनन कार्य कराया जा रहा है। इसमें 167 छानों में करीब 165 परिवार हैं। करीब एक हजार की आबादी है। इन श्रमिकों में करीब आठ सौ वोटर हैं। इनका काम रेत छानने, पत्थर भरने, गाड़ी चलाने आदि है। यूपी के विभिन्न शहरों के ये खनन श्रमिक लोकतंत्र के पर्व में प्रतिभाग करना चाहते हैं लेकिन अपनी मजबूरी को सामने रखते हुए मतदान करने के सवाल पर श्रमिकों ने खुलकर अपनी बात रखी। श्रमिकों ने कहा कि उनके वोट यहां डालने की व्यवस्था यहीं पर की जाए। वह 800 सौ रुपये प्रति व्यक्ति किराया खर्च कर अपने क्षेत्र में वोट डालने नहीं जा सकते हैं।
रविवार दोपहर करीब एक बजे खनन क्षेत्र में एक झान में बनी अस्थायी झोपड़ी में कुछ श्रमिक परिवार आराम करते मिले, जबकि पास ही कई श्रमिक गाड़ियों में खनन सामग्री भरने में जुटे थे। एक परिवार के मुखिया खनन श्रमिक यूपी के जिला सीतापुर, ग्राम सिंघोड़ा निवासी राम बहादुर से जब यह सवाल किया कि वह लोकसभा चुनाव में वोट डालने गांव कब जा रहे हैं तो मायूस दिखे। नहीं जा पाने की बेबसी बताई।
सीतापुर के अमरेता निवासी श्रमिक नन्हें, बसमा निवासी सोने लाल बोले, कैसे जाएं एक तरफ का किराया ही साढे़ तीन सौ रुपये है और वापसी तक कुल आठ सौ रुपये लग जाएंगे। इसलिए उनके परिवार इस बार वोट डालने नहीं जा पाएंगे। बोले, प्रशासन उनका वोट यहीं डलवा दे तो लोकतंत्र के इस महापर्व में अवश्य हिस्सा लेंगे।
राम बहादुर ने बताया कि दो दिन पहले एक ट्रक रेत करीब 80 क्विंटल छानकर बेचा। 16 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 1280 रुपये पर बीस प्रतिशत ठेकेदार को कमीशन दिया। पूरा परिवार इस काम में लगता है तब कुछ आय हो पाती है। संवाद
यह भी जानें
-खनन में बैराज के डाउन में 400 गाड़ी और कालाझाला गेट से प्रतिदिन 130 गाड़ी पत्थर, रेत निकलता है। इससे वन निगम को करोड़ों का राजस्व मिलता है।
-दो दिन में एक ट्रक रेत छान पाते हैं श्रमिक।
-छह महीने यहां और छह महीने गांव में रहकर मजदूरी करते हैं
- बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं।